" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

Dhan Teras Pooja Vidhan/ धन तेरस पूजा विधान  

Dhan Teras Pooja Mahurt 2019/ धनतेरस पूजा महूर्त 2019

कार्तिक मास की तेरस तिथि को धनतेरस कहते है. धन तेरस की पूजा माँ लक्ष्मी के आशीर्वाद प्राप्ति के लिए की जाती है. आज के दिन महिलाएं रात्रि भोजन  के पश्चात मिटटी का दिया अपने घर द्वार पर पूरी रात के लिए जलाती  हैं.  यह दिया केवल घर की महिलाओं द्वारा ही जलाया जाता है . एक कौड़ी में छेद कर दिए में डाली जाती है. चार बत्ती दिए में जलाकर उसे  चावल, चार सुहाली, थोडा सा गुड, फूल, दक्षिणा और धूप से पूजा कर चार फेरी दे कर घर के मुख्य द्वार पर रख दिया जाता है.

धनतेरस के दिन घर में पुराने बर्तन को बदलकर नए बर्तन खरीदने की परंपरा है. कुछ लोग शुभता के लिए सामर्थ्य अनुसार चांदी के बर्तन भी खरीदते हैं. धन तेरस  वैद्य धन्वन्तरी की जयंती भी है. इस  दिन बुजुर्गवार च्वनप्राश आदि औषधियाँ अपनी लम्बी आयु एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए  भी खरीदते है .

 

Dhan Teras Katha/ धनतेरस  कथा

Dhan Teras Pooja Mahurt 2019/ धनतेरस पूजा महूर्त 2019

 

मान्यताओं के अनुसार आज के दिन भगवान् विष्णु माता लक्ष्मी संग मृत्यु-लोक (पृथ्वी) पर विचरण करने आये थे. दोनों  कुछ देर साथ-साथ विचरण करते रहे फिर भगवान् विष्णु माता से बोले – कि मैं दक्षिण-दिशा की ओर जा रहा हूँ , तुम उधर मत देखना . यह कह कर ज्योंही भगवान ने राह पकड़ी त्योंही माता लक्ष्मी पीछ-पीछे चल पड़ी .

कुछ दूर पर सरसों का खेत दिखाई पड़ा उसके बाद ऊख (गन्ने) का खेत दिखाई दिया . माता ने वही श्रृंगार किया और ऊख तोड़कर चूसने लगी . तत्क्षण भगवान विष्णु लौट आये और यह देखकर क्रोधित हो गए और माता को श्राप दे दिया –कि जिस किसान का ये खेत है बारह वर्ष तक उसकी सेवा करों .

ऐसा कह कर भगवान  क्षीर-सागर चले गये माता लक्ष्मी किसान के घर जा कर रहने लगी किसान धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया .बारह वर्ष बीत जाने पर श्राप-मुक्त माता लक्ष्मी जाने को तैयार हुई किन्तु किसान ने रोक लिया . भगवान जब किसान के घर लक्ष्मी को बुलाने आये तो किसान ने लक्ष्मी को नहीं जाने दिया . तब भगवान विष्णु ने उसे कौडियाँ दी और बोले तुम परिवार सहित गंगा स्नान करो इन कौडियों को भी जल में छोड़ देना . जब तक तुम नहीं लौटोगे तब तक मैं नहीं जाऊँगा  .

किसान ने ऐसा ही किया . किसान ने जैसे ही गंगा में कौड़िया डाली चार भुजाओं ने कौडियाँ ने ले लीं, जब किसान ने ऐसा आश्चर्य देखा तो गंगा जी से पुछा –ये क्या चमत्कार है, ये चार भुजाये किसकी है तब गंगा ने उसे बताया की ये भुजाये मेरी थी पर जो कौड़ियाँ तूने मुझे भेट की है किसकी दी हुई है ? किसान ने बोला मेरे घर में दो सज्जन आये है ये उन्होंने ही दी हैं.

गंगा जी बोली – तुम्हारे घर जो लोग आये है वे स्वयं माँ लक्ष्मी और चतुर्भुज भगवान विष्णु है. तुम माता को जाने नहीं देना वरना पहले की भांति निर्धन हो जाओगे . यह जान कर जब किसान  घर पंहुचा तो भगवान से बोला- “मैं माता को नहीं जाने दूंगा “. तब भगवान ने किसान को समझाया इनको मेरा श्राप था इस लिए लक्ष्मी ने  बारह वर्ष तक तुम्हारी सेवा की, फिर लक्ष्मी तो  चंचल होती है इनको बड़े-बड़े नही रोक सके .

किसान ने हठपूर्वक पुन: कहा “ना मैं  नही जाने दूँगा माँ को.” किसान की जिद्द देख माता ने स्वयं कहा –यदि तुम मुझे रोकना चाहते तो सुनो कल तेरस है, तुम अपना घर स्वच्छ रखो . रात्रि में घी का दीपक जला कर रखना, तब मैं  तुम्हारे घर आउगी .उस समय तुम मेरी पूजा करना, किन्तु मैं  तुम्हे दिखाई नही दूंगी .किसान मान गया बोला ऐसा ही करुगा माँ .

दूसरे दिन माँ के कहेनुसार किसान ने पूजन किया .उसका घर फिर धन-धान्य से पूर्ण से पूर्ण हो गया . इसी तरह हर वर्ष तेरस तिथि को माँ लक्ष्मी की पूजा करने से माँ लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है.

श्रीलक्ष्मी चालीसा                          धन लक्ष्मी स्तोत्र                            वैदिक महालक्ष्मी अनुष्ठान 


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