" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे

नक्षत्र फल 

nakshtra

प्राचीन काल में ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों ने राशियों को सरलता से समझने के लिए  12 भागों में बाँट दिया था और आकाश को 27 नक्षत्रों में । यह तारों का वह समूह है जो चन्द्रमा के पथ में आते हैं. पुराणों के अनुसार इन्हें दक्ष प्रजापति की पुत्रियाँ बताया गया है और इन सभी का  विवाह चन्द्रमा के साथ किया गया था. इन नक्षत्रों की गणना ज्योतिष में महत्वपूर्ण योगदान के लिए की जाती है.  वैदिक ज्योतिष में एक नक्षत्र को एक सितारे के समान समझा जाता है।  सभी नक्षत्रों को 4 पदों में या 3डिग्री और 20 मिनट के अन्तराल में बांटा गया।  इस प्रकार  प्रत्येक राशि में 9 पद शामिल हैं। यह 27 नक्षत्र  किस प्रकार जातकों के गुण एवं स्वभाव पर प्रभाव डालते हैं  आइये जाने....

1.अश्वनी नक्षत्र  : अश्वनी नक्षत्र में जन्मे जातक सामान्यतः सुन्दर ,चतुर, सौभाग्यशाली एवं स्वतंत्र विचारों वाले होते हैं. वह पारंपरिक रूढ़ीवादी विचारधारा से विपरीत अपनी आधुनिक सोच के लिए मित्रों में प्रिसिद्ध होते हैं. आप सभी से बहुत प्रेम करने वाले होते हैं परन्तु आप अपने ऊपर किसी का भी दबाव नहीं सहते हैं. आपको स्वतंत्र कार्य करने एवं निर्णय लेने की आदत होती है इसलिए किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप आपको पसंद नहीं होता है. आपकी उन्नति भी स्वतंत्र कार्य करने और स्वतंत्र निर्णय लेने के कारण ही होती है . . . . . . आगे पढ़ें

2. भरणी नक्षत्र: यदि आपका जन्म भरणी नक्षत्र में हुआ है तो आप एक दृढ़ निश्चयी, चतुर एवं सदा सत्य  बोलने वाले होंगे. शुक्र के कारण जहाँ आप सुखी एवं ऐश्वर्य पूर्ण जीवन जियेंगे वही शुक्र मंगल की राशि में आपकी काम वासना भी अधिक बढ़ाएगा. आपके अनेक मित्र होंगे और आप अपने मित्रों में बहुत अधिक लोकप्रिय भी होंगे क्योंकि आप अपने मित्रों की सहायता करने में कभी पीछे नहीं हटते हैं. मित्रता करने में आप विशेष सावधानी भी बरतते हैं. चुगलखोर और छिछोरे  मित्र आपको कतई पसंद नहीं है.. . . . . . आगे पढ़ें

3.कृतिका नक्षत्र: कृतिका नक्षत्र में जन्मा जातक सुन्दर और मनमोहक छवि वाला होता है. वह केवल सुन्दर ही नहीं अपितु गुणी भी होते हैं. आपका व्यक्तित्व किसी राजा  के समान ओजपूर्ण एवं पराक्रमी होता है. कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है अतः आप तेजस्वी एवं तीक्ष्ण बुद्धि के स्वामी होते हैं. बचपन से ही आपकी विद्या प्राप्ति में अधिक रूचि रहती है और आगे चलकर कृतिका नक्षत्र का जातक विद्वान् होता है. यह सूर्य का विशेष गुण है.. . . . . . आगे पढ़ें

4.रोहिणी नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति सदा दूसरों में गलतियां ढूँढता रहता है. आप कोई भी ऐसा मौका नहीं हाथ से जाने देते जिसमे कि सामने वाले की त्रुटियों की चर्चा आप न करें. आप शारीरिक रूप से कमज़ोर होते हैं इसलिए कोई भी छोटी से छोटी मौसमी बदलाव के रोग भी आपको अक्सर जकड लेते हैं. आप एक ज्ञानी परन्तु स्त्रियों में आसक्ति रखने वाले होतें हैं.. . . . . . आगे पढ़ें

5.मृगशिरा नक्षत्र: यदि आपका जन्म मृगशिरा नक्षत्र में हुआ है तो आप स्वभाव से चतुर एवं चंचल होते हैं. आप अध्ययन में अधिक रूचि रखते हैं. माता पिता के आज्ञाकारी और सदैव साफ़ सुथरे आकर्षक वस्त्र पहनने वाले होते हैं. आपको श्वेत रंग अत्यधिक प्रिय है . मृगशिरा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों का चेहरा बहुत ही आकर्षक एवं सुन्दर होता है. . . . . . आगे पढ़ें

6.आद्रा नक्षत्र: यदि आपका जन्म आद्रा नक्षत्र में हुआ है तो आपकी रूचि अध्यन में बहुत अधिक होगी. आप सदैव ही अपने आस पास की घटनायों के बारे में जागरूक रहते हैं . किताबों से विशेष लगाव आपकी पहचान है. एक और विशेषता जो की आद्रा नक्षत्र में पैदा हुए जातकों में अक्सर देखी गयी है वह है उनकी व्यापार करने की समझ. . . . . . आगे पढ़ें

7.पुनर्वसु नक्षत्र: पुनर्वसु नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति बेहद मिलन सार और दूसरों से प्रेमपूर्वक व्यवहार रखने वाले होते हैं. परन्तु बहुत कम लोग आपके स्नेहपूर्वक व्यवहार को समझ पाते हैं और प्रायः आपके व्यवहार को कायरता से जोड़ देतें हैं. आपके गुप्त शत्रुओं की संख्या अधिक होती है.आपको अधिक संतान की प्राप्ति भी होती है परन्तु उनका आपस में या आप के साथ  व्यवहार सौहार्दपूर्ण नहीं होता है. . . . . . आगे पढ़ें

8.पुष्य नक्षत्र: यदि आपका जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ है तो आपमें नित नए काम करने की प्रवृत्ति बनी रहेगी. हर बार नए काम की खोज और परिवर्तन  आपसे अधिक परिश्रम भी कराएगा. कठिन परिश्रम करने पर भी आपको सफलता आसानी से नहीं मिलेगी और फल प्राप्ति में अक्सर देरी हो जाती है, परन्तु. . . . . . . आगे पढ़ें

9.अश्लेशा नक्षत्र: अश्लेशा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का प्राकृतिक गुण सांसारिक उन्नति में प्रयत्नशीलता, लज्जा व सौदर्यौपसना है. इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की आँखों एवं वचनों में विशेष आकर्षण होता है.  लग्न स्वामी चन्द्रमा के होने के कारण ऐसे जातक उच्च श्रेणी के डॉक्टर , वैज्ञानिक या अनुसंधानकर्ता भी होते हैं क्योंकि चन्द्रमा  औषधिपति हैं.  इस नक्षत्र में जन्मे जातक बहुत चतुर बुद्धि के होते हैं.. . . . . . . . आगे पढ़ें .

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