Day: Friday Date: 14-august-2026
Tithi: Shukla Dwitiya Nakshatra: Purva Phalguni
Yoga: - Rahu Kaal: 10:46 - 12:25
More
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

ओम का महत्व

 ओम की व्याख्या जाति धर्म से परे है, यह सार्वभौमिक है। ओम को ब्रह्माण्ड की प्रथम ध्वनि के रूप मे जाना जाता है।

वेदों मे ईश्वर को ओम से संबोधित किया है। सम्पूर्ण ब्रह्मांड ओम मय है, प्रकृति को अगर हम गौर से देखे तो सब से ओम की ध्वनि आती है। हमारी श्वासो की ध्वनि से लेकर पेड़-पौधो, प्रकृति के हर चीज से ओम की ध्वनि आती है इसलिए ओम मे सम्पूर्ण ब्रह्मांड व्याप्त है। ओम हिन्दू धर्म का प्रतीक चिह्न और सबसे पवित्र शब्द माना गया है। ओम का चिह्न सम्पूर्ण ब्रह्मांड को प्रदर्शित करता है। हिंदुओ के हर धर्म में हर शास्त्र मे ओम की महानता का वर्णन है. ओम को मंत्रो के राजा माना जाता है क्योंकी कोई भी मंत्र बिना ओम के पूर्ण नही माना जाता है इसलिए हर मंत्र के पहले ओम लगाते है। ओम सकारत्मक ऊर्जा को उत्पन्न करता है, जहां ओम का उच्चारण करते है वह जगह पवित्र होती है, तथा वहां से  नकारत्मक ऊर्जा कोसो दूर होती है।

मंत्र का जप का महत्व

 ॐ शब्द तीन ध्वनियों से बना हुआ है अ, उ, म इन तीनों ध्वनियों से मिल के उच्चारित किया जाता है। ओम के उच्चारण मे जीभ, होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों का एक साथ उपयोग होता है। ओम से निकलने वाली स्पंदन ध्वनि शरीर के सभी चक्रों और हारमोन स्राव वाली ग्रंथियों को प्रभावित करती है। जिससे शरीर नियंत्रित होता है, शरीर के सारे अवयव इसीसे काम करते है, शरीर की बीमारियां दूर होती है।ओम के चिन्तन मनन से चित एकाग्र होता है। मानसिक परेशानी वाले व्यक्ति को ओम का जप तनाव को दूर करता है। ओम के जप से कुण्डली शक्ति जागृत होती है। प्रतिदिन ओम का उच्चारण ऊर्जा शक्ति का संचार करता है, और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर, असाध्य बीमारियों को दूर करता है। योग में काम, क्रोध, मोह, भय, लोभ चित्त की विकृति का वर्णन है, ओम से इन विकृति को दूर किया जाता है। ओम के जप से आत्मा शांति, आंनद की प्राप्ति होती है।

ओम उच्चारण की विधि और सावधानियां

 प्रातः पवित्र होकर साफ आसान पर ओंकार ध्वनि का दीर्घ उच्चारण दस से पंद्रह मिनट सुखासन मे बैठ के करना चाहिए। ओम का उच्चारण उच्च और गहरा नाभि से करना चाहिए, उच्चारण करते वक्त ओम का कंपन पैदा होना चाहिए। शांत मन से धीरे से गहरी श्वास के साथ ओम उच्चारण का अभ्यास करना चाहिए। ओम का जप आप किसी मंत्र के साथ भी कर सकते है, जो भी मंत्र आप सुख पूर्वक श्रद्धा से कर सकते हो उसका अभ्यास करना चाहिए।

हृदय विकार, हाई ब्लड प्रेशर वालो को ओम का जप धीरे से करना चाहिए।

जो भी ओम का जप करना चाहते वो धीरे-धीरे अभ्यास से प्रयास करे, क्योंकि एक दम से हर व्यक्ति ओम की शक्ति को झेल नही सकता, हाँ पर अभ्यास से यह संभव है।

दिव्याकान्ति लोकनार

AstroTips Team

 


Puja of this Month

Rashifal 2026

Copyright © 2017 astrotips.in. All Rights Reserved.
Design & Developed by : v2Web
slot88