" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे

पूजा घर कैसा हो                              

  • पूजा का स्थान घर के ईशान कोण में स्थित कमरे में होना चाहिए | इसे उत्तर अथवा पूरब दिशा में भी बनवा सकते हैं |
  • पूजा गृह में भगवान् की प्रतिमा कमरे के पूरब अथवा पश्चिम दिशा में रखें | जिससे पूजा करते समय आपका मुख पूरब या पश्चिम दिशा की ओर रहेगा
  • पूजा गृह के सामने ‘सूर्यास्त’ से ‘सूर्योदय’ तक लैम्प या दीपक जलता रहना चाहिए-इससे परिवार में आरोग्यता, सुख-समृद्धि तथा सम्पन्नता आती है |
  • उत्तर दिशा के प्रमुख देवता “कुबेर” हैं | और इनका ग्रह “बुध” हैं | इस लिए कृष्णपक्ष में बुधवार के दिन सुबह या शाम को ‘तिजोरी’ की पूजा करनी चाहिए |
  • पूजा गृह को स्वच्छ और पवित्र होना चाहिए | तथा इसमें कोइ अनावश्यक वास्तु या सामन नहीं रखना चाहिए |
  • वृहस्पतिवार तथा शुक्रवार के दिन तिजोरी की पूजा करें | शुभ होता है |
  • पूजा की सामग्री और पुस्तक रखने के लिए आलमारी कमरे की पश्चिम और दक्षिण की तरफ होनी चाहिए |
  • पूजा गृह का फर्श तथा दीवार का रंग हल्का पीला, या सफ़ेद अथवा हल्का नीले रंग का होना चाहिए |
  • पूजा गृह में किसी भी प्रतिमा ( मूर्ति ) की लम्बाई ‘चार इंच’ से अधिक नहीं होनी चाहिए | पूजा गृह में बैठे हुए “गणेशजी” की प्रतिमा रखनी चाहिए |
  • “हनुमानजी” की प्रतिमा को पूजा गृह के नैत्रित्य कोण ( दक्षिण-पश्चिम ) में स्थापित करें |
  • पूजा गृह में “महालक्ष्मीजी” के साथ “गणेशजी” की प्रतिमा को सदा “महालक्ष्मीजी” के बाँईं तरफ ही स्थापित करें |
  • पूजा गृह को हमेशा ताजे पुष्प से सजावें, तथा दिव्य माहौल बनाने के लिए सुगन्धित अगरबत्ती, मोमबत्ती, धूप जलावें |
  • ईशान कोण में पूजा गृह हो तो उसका फर्श अन्य कमरों के बराबर में ही रखें |

               पूजा गृह में क्या नहीं होना चाहिए

  • पूजा गृह में अथवा पूजा के स्थान पर भग्न (टूटी) हुई प्रतिमा अथवा चित्र नहीं रखना चाहिए |
  • पूजा गृह के कमरे के ऊपर या नीचे के मंजिलों में शौचालय नहीं रहना चाहिए |
  • भगवान की फोटो- चित्र इत्यादि कमरे के उत्तर या दक्षिण दिशा की दीवार पर नहीं लगानी चाहिए |
  • दक्षिण दिशा में पूजा गृह नहीं होना चाहिए | न ही शयनकक्ष में पूजा का स्थान होना चाहिए |
  • पूजा का स्थान कमरे के कोण में नहीं रखना चाहिए | इसे गृह के विस्तार के बीच में या कोने से हटाकर रखना ही उचित है |
  • पूजा गृह का दरवाजा टीन अथवा लोहे का नहीं होना चाहिए |
  • पूजन गृह में मृत पूर्वजों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए | और न ही सौन्दर्य प्रसाधन, झाड़ू अथवा अनावश्यक सामान रखना चाहिए |
  • पूजा गृह में “हनुमानजी” की प्रतिमा को छोड़कर अन्य ‘भगवानजी’ की प्रतिमा को नैत्रित्य कोण में स्थापित ना करें |
  • जीने के नीचे या बेसमेन्ट में पूजा गृह नहीं होना चाहिए |

पूजा गृह में तीन देवी की प्रतिमा, दो शिवलिंग, तीन “गणेशजी” की प्रतिमा और दो संख, दो “सूर्यदेवजी” की प्रतिमा व दो “शालिग्रामजी” की पिण्डी नहीं पूजनी चिहिए.

सुजीत

Astrotips Team


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