" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे

पूजा के समय रखें यह सावधानियां 

पूजा-पाठ करने से इंसान के दुख-दर्द तो कम होते ही हैं साथ ही शांति भी मिलती है। इसी कारण से पुराने समय से ही पूजा करने की परंपरा चली आ रही हैं। शास्त्रों के अनुसार जिन घरों में प्रतिदिन पूजा की जाती है वहां का वातावरण सकारात्मक और पवित्र रहता है। धूप दीप और हवन आदि से घर में उपस्थित कीटाणु मर जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन नियमों के अनुसार पूजन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार तो होता ही है साथ ही देवी देवताओं की कृपा भी घर पर बनी रहती है और गृह दोष भी समाप्त हो जाता है।

  • गणेश जी, दुर्गा जी, शिवजी, विष्णु और सूर्यदेव को पंचदेव कहा गया है। सुख की इच्छा रखने वाले हर मनुष्य को प्रतिदिन इन पांचों देवों की पूजा अवश्य करनी चाहिए। किसी भी शुभ कार्य से पहले भी इनकी पूजा अनिवार्य है।
  • शिवजी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों और तुलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए। सूर्यदेव की पूजा में अगस्त्य के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। भगवान श्रीगणेश की पूजा तुलसी के पत्ते नहीं रखना चाहिए।
  • यदि आप प्रतिदिन घी का एक दीपक भी घर में जलाते हैं तो घर के कई वास्तु दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं।
  • सुबह नहाने के बाद ही पूजन के लिए फूल तोड़ना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार जो व्यक्ति बिना नहाए फूल या तुलसी के पत्ते तोड़कर देवताओं को अर्पित करता है, उसकी पूजा देवता ग्रहण नहीं करते है।
  • पूजन में अनामिका उंगली (छोटी उंगली के पास वाली यानी रिंग फिंगर) से गंध (चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी) लगाना चाहिए।
  • पूजन में देवताओं के सामने धूप, दीप अवश्य जलाना चाहिए। नैवेद्य (भोग) भी जरूरी है। देवताओं के लिए जलाए गए दीपक को स्वयं कभी नहीं बुझाना चाहिए।
  • गंगाजल, तुलसी के पत्ते, बिल्वपत्र और कमल, ये चारों किसी भी अवस्था में बासी नहीं माने जाते हैं। इसलिए इनका उपयोग पूजन में कभी भी किया जा सकता है। इन चार के अलावा भगवान को कभी भी बासी जल, फूल और पत्ते नहीं चढ़ाना चाहिए।

पं धीरेन्द्र नाथ दीक्षित 

Astrotips Team


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