" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे

षट्तिला एकादशी / Shattila Ekadashi/ Shattila Ekadashi Vrat 

12 जनवरी (शुक्रवार) 2018

shattila ekadashi

षट्तिला एकादशी का पौराणिक महत्व 

प्रति वर्ष माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाता है.  जैसा कि नाम से हे ज्ञात हो रहा है इस एकादशी में तिलों का प्रयोग किया जाता है. हिन्दू धर्म के अनुसार तिल बहुत पवित्र माने जाते हैं और पूजा में इनका विशेष महत्व होता है.

छ: प्रकार से तिलों के उपयोग के कारण ही इस एकादशी का नाम षट्तिला एकादशी पड़ा.

  1. तिल से स्नान करना
  2. तिल का उबटन लगाना
  3. तिल से हवन करना
  4. तिल से तर्पण करना
  5. तिल का भोजन करना
  6. तिलों का दान करना

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार षट्तिला एकादशी के दिन जो भी व्यक्ति व्रत करता है उसे तिलों से भरा घडा़ भी ब्राह्मण को दान करना चाहिए. ऐसी मान्यता है की जितने तिलों का दान वह करेगा उतने ही ह्जार वर्ष तक वह स्वर्गलोक में रहेगा.

श्रद्धा भाव से षटतिला एकादशी का व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है.  माघ मास में पूरे माह व्यक्ति को अपनी समस्त इन्द्रियों पर काबू रखना चाहिए. काम, क्रोध, अहंकार तथा बुराई का त्याग कर भगवान की शरण में जाना चाहिए.

षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजाका विधान है । पद्म पुराण के अनुसार चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए। उसके बाद श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़ा, नारियल अथवा बिजौर के फल से विधि विधान से पूज कर अर्घ्य देना चाहिए।

पुष्य नक्षत्र में तिल तथा कपास को गोबर में मिलाकर उसके 108 कण्डे बनाकर रख लें. माघ मास की षटतिला एकादशी को सुबह स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. व्रत करने का संकल्प करके भगवान विष्णु जी का ध्यान करें.

रात्रि में गोबर के कंडों से हवन करें. एकादशी के रात्रि को 108 बार “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र से उपलों को हवन में स्वाहा करना चाहिए।रात भर जागरण करके भगवान का भजन करें . अगले दिन भगवान का भजन-पूजन करने के पश्चात खिचडी़ का भोग लगाएं. ब्राह्मणों भोजन कराएं एवं दान में उपयोगी वस्तुएं दें.

सागार: इस दिन तिल पट्ठी का सागार लिया जाता है.

फल: षट्तिला एकादशी व्रत करने से मनुष्य का सौभाग्य बली होगा. कष्ट तथा दरिद्रता दूर होती है . विधिवत तरीके से व्रत रखने से स्वर्ग लोक की प्राप्तिहोती है.

Shattila Ekadashi Katha/ षट्तिला एकादशी कथा

    < पौष पुत्रदा एकादशी                                                                                                                        जया एकादशी >
Paush Putrada Ekadashi                                                                                                   Jaya Ekadashi>

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