" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

Venus In Pisces 2017/ Venus Transit 2017/शुक्र का राशि परिवर्तन 2017/ शुक्र का मीन राशि में गोचर 2017

Venus Transit In Pisces/ Venus  Transit In Meen Rashi 2017,  शुक्र का राशि परिवर्तन 2017/ शुक्र का मीन राशि में गोचर 2017

27 जनवरी (शुक्रवार) , 2017

समय: 20:31

शुक्र राशि परिवर्तन का आपकी राशि पर प्रभाव 

प्रेम , सौन्दर्य , सुविधा , ग्लैमर , गीत – संगीत , मनोरंजन का कारक शुक्र  ग्रह

मेष : दूसरे भाव और सप्तम भाव का स्वामी होने के कारण मेष लग्न के जातकों के लिए शुक्र द्वादश भाव में आ रहा है और वह भी अपनी उच्च राशि में अतः यह यहाँ राजयोग बनाएगा , सुख – सुविधाओं के ऊपर खूब खर्च होगा , जीवन साथी के कारण या उसके ऊपर धन खर्च करेंगे , विदेशी कार्यो में खूब सफलता मिलेगी . आर्थिक मामलों में लाभ कम होगा . प्रेम सम्बन्ध खूब पनपेंगे , सुख का आभास होगा .

वृष : लग्नेश और षष्टेश शुक्र एकादश भाव गत उच्च का होगा , यह अपने छठे भाव से छठे स्थान पर है अतः कर्ज और शत्रुओं का नाश होगा , आर्थिक मामलों में खूब सफलता मिलेगी , इस समय यदि परिश्रम करेंगे तो खूब लाभ होगा . बौद्धिक क्षमता में थोड़ी कमी आएगी या यूँ कहूँ की  मन चंचल रहेगा , ऐशो आराम की ओर रुझान अधिक बढेगा और शिक्षा – दीक्षा से मन हटेगा .

शुक्र शांति के उपाय 

मिथुन : मिथुन लग्न में शुक्र द्वादश और पंचम भाव का स्वामी है अतः यश और कीर्ति के लिए अत्यंत ही प्रभाव शाली समय रहेगा , मन उत्साह से भरा रहेगा , पदोन्नति के लिए अत्यंत ही उपयुक्त समय है , प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आयेंगे . लेकिन यह समय संतान और शिक्षा से सम्बंधित कार्यों के लिए बहुत अच्छा नहीं है . नए प्रेम – प्रसंग उत्पन्न हो सकते हैं या आप उसमे उलझ सकते है तो रिश्ते बनाते समय थोडा सतर्क रहें.

कर्क : यहाँ शुक्र चतुर्थ और एकादश भाव का स्वामी है जो अब भाग्य स्थान पर आ रहा है, अतः आर्थिक मामलों में अद्भुत सफलता देगा , भाग्य पक्ष खूब सहयोगी रहेगा . जमीन – जायदाद के कार्यों में सफलता दिखेगी तो, परन्तु जल्दी मिलेगी नहीं इस समय सुख – सुविधाओं से सम्बंधित कार्यों के बारे में सोचेंगे तो सही परन्तु उसमे रुकावटें आएँगी. 

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सिंह : सिंह लग्न के जातकों के लिए शुक्र दशम भाव और तृतीय भाव का स्वामी है जो अब अष्टम में उच्च का होगा अतः मान – सम्मान में वृद्धि तो होगी परन्तु स्वास्थ्य के लिए यह समय अच्छा नहीं होगा. जनेंद्रियों में कोई रोग उत्पन्न होने की सम्भावन रहेगी . स्त्री जातकों के कारण कुछ परेशानी उत्पन्न होगी और वैवाहिक जीवन में भी कुछ तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है . पदोन्नति के लिए भी यह समय परिणाम दायक नहीं होगा भले ही कितनी तारीफ क्यों ना हो .

कन्या : कन्या लग्न के जातकों के लिए शुक्र अत्यंत ही योगकारक ग्रह है क्योंकि यह दूसरे स्थान और नवम स्थान का स्वामी है अब यह सप्तम भाव में उच्च का होगा जिसके कारण कार्य – व्यापर में अद्भुत सफलता मिलेगी , इस दौरान यात्राओं से खूब लाभ मिलेगा , विपरीत लिंग के जातकों से लाभ मिलेगा और अच्छे तथा प्रभाव शाली लोगों से मित्रता और साझेदारी होगी . शुक्र का यह परिवर्तन आपकी राशि के लिए बहुत हे अच्चा प्रभाव देगा.

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तुला : तुला लग्न के जातकों के लिए शुक्र लग्नेश और अष्टमेश है और इस समय छठे भाव में उच्च का होगा अतः महत्वाकांक्षा बहुत बढ़ेगी , अपनी क्षमता से अधिक कार्य करने का प्रयास करेंगे परन्तु उतनी सफलता नहीं मिलेगी जितनी आपकी सोच होगी. शुक्र की यह स्थिति आपके शत्रुओं के लिए घातक है , परन्तु कर्ज लेने से बचे क्योंकि इस समय यह बहुत जल्दी उपलब्ध होगा परन्तु जल्दी लौटाया नहीं जायेगा . कामेच्छा भी बहुत बढ़ेगी , कुंडली में शुक्र राहु की युति हो तो अजनबी लोगों से शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय सावधानी रखें.

वृश्चिकवृश्चिक लग्न में शुक्र द्वादश और सप्तम भाव का स्वामी है जो अब पंचम भाव में उच्च का होगा , मन खूब प्रसन्न रहेगा और कला के क्षेत्र में रूचि बढ़ेगी . शिक्षा और प्रतियोगिता के क्षेत्र में बहुत सफलता मिलेगी . मान–सम्मान में भी खूब वृद्धि कराएगा यह शुक्र , प्रेम संबंध सुधरेंगे साथ ही नए सम्बन्ध भी बनेगे , यदि विवाह के लिए तैयारी कर रहे हैं तो प्रस्ताव देने के लिए यह उचित समय है . यात्रायें बहुत लाभप्रद और आनंद दायक होंगी साथ ही यदि यह यात्राएं कार्य – व्यापार से सम्बंधित है तो बहुत लाभ देने वाली भी होंगी .

शनि गोचर- 26 जनवरी  2017

धनु : छठें और एकादश भाव का स्वामी शुक्र अब आपके चतुर्थ भाव में उच्च का होगा , चतुर्थ भाव में शुक्र वैसे ही अत्यंत प्रभावशाली होता है और उच्च का हो तो कहना ही क्या . भूमि – भवन और वाहन से समबन्धित यदि कोई कार्य सोच रहे थे तो कर डालिए उचित समय है . पारिवारिक सुखों की अच्छी अनुभूति होगी . ऐशो आराम में समय बीतेगा और धन खर्च होगा . काम – वासना पर नियंत्रण रखना होगा क्योंकि इसके कारण धन और प्रतिष्ठा की हानि संभव है .

मकर : मकर लग्न में शुक्र पंचम और दसम स्थान का स्वामी है और अब यह तीसरे भाव में उच्च का हो रहा है अतः पुरुषार्थ और बौद्धिक क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि देगा . बहनों को सुख मिलेगा और उनके कारण आपको भी लाभ होगा . मित्र सहयोगी रहेंगें परन्तु यहाँ बैठा शुक्र आपको गूढ़ बातें छिपाने में परेशानी उत्पन्न करेगा अतः आप हर बात खुल कर बोल देंगे और जो नहीं कहनी चाहिए वह भी कह देंगे जिससे कई बार विषम परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है .अतः इससे बचें . भाग्य का साथ रहेगा अतः नए कार्य प्रारंभ कर सकते है या उसकी योजना बना सकते हैं . संपर्क और प्रभाव बढेगा परन्तु उसका तात्कालिक लाभ नहीं मिलेगा .

धन से सम्बंधित समस्या हो तो कराएं वैदिक महा लक्ष्मी अनुष्ठान 

कुम्भचतुर्थ और भाग्य स्थान का स्वामी दूसरे भाव में उच्च का होगा अतः भाग्य वश आर्थिक लाभ होंगे , कोई स्थायी संपत्ति मिलने का योग भी बनेगा . वाणी मधुर रहेगी और यह इस समय आपके स्वयं के मन को शांत रखने में भी मददगार होगा . इस समय पुराने रोगों से छुटकारा मिलेगा . बौधिक क्षमता को प्रखर करेगा . विपरीत लिंग के जातकों के कारण लाभ मिलेगा और उनके साथ के कारण  भाग्य और चमकेगा  .

मीन :  शुक्र का प्रवेश आपके लग्न में ही हो रहा है . मीन लग्न में शुक्र मुख्य मारकेश की भूमिका में रहता है क्योंकि यह तीसरे और अष्टम भाव का स्वामी है अतः यह जहाँ एक ओर भौतिक सुखों में अभूतपूर्व वृद्धि करेगा वहीँ यह शारीरिक कष्ट भी देगा . स्वास्थ्य को लेकर बेहद सतर्क रहें क्योंकि लग्नेश भी छठे भाव में है. ऐसे में अष्टमेश का लग्न में आना कष्टकारी है . हाँ धन और सुख – सुविधाओं के मामले में यह अत्यंत ही सकारात्मक परिणाम देगा . अनायास ही सम्मान प्राप्त होगा . जो लोग पहले से ही शुक्र से सम्बंधित कार्यों में हैं उन्हें बहुत लाभ होगा . इस समय नास्तिकता भी बढ़ेगी और धर्म से विमुख और काम – वासन की ओर अधिक रुझान बढेगा.

धन से सम्बंधित समस्या हो तो इस समय शुक्र का उपचार करना अधिक लाभकारी होगा .

शुभम भवतु !

ज्योतिषविद पं. दीपक दूबे  

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