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वैदिक ज्योतिष के अनुसार ‘अंगारक दोष ‘ एक अशुभ योग है, जिसमे मंगल की युति राहु या केतु के साथ बनती है. इस युति
के परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं की यह युति किस घर में बनी है.
‘अंगारक योग’ के नकारात्मक परिणामों को कम करने का एकमात्र प्रभावी उपाय है अंगारक दोष शांति . अनुष्ठान में शुभ
महूर्त, दिशा, हवन समिधा का विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि राहु/केतु और मंगल के नकारात्मक प्रभावों को अधिक से
अधिक घटाया जा सके. सभी प्रमुख कर्म काण्ड मेरी देख रेख में संपन्न होते है.
| अंगारक दोष शांति मंगल+ राहु/केतु मन्त्र जप, स्तुति एवं यज्ञ |
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