" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

ग्रहों से सम्बंधित रोग

जिस प्रकार जन्म कुंडली में ग्रहों की स्तिथियाँ  हमारे जीवन और उनसे जुडी महत्वपूर्ण घटनायों को प्रभावित करती हैं उसी प्रकार हमारे शरीर की रचना एवं रोग भी इन्ही ग्रहों की दशा एवं महा दशा पर निर्भर करते हैं. कुछ ग्रह अकेले ही एक विशेष रोग को जन्म देते है तो कुछ रोगों को कई ग्रह के योग जन्म देते हैं. ग्रह से सम्बन्धित रोगों का विवरण –

सूर्य – नेत्र रोग, रतौधी, अंधापन, ह्रदय रोग, रक्त चाप, हार्ट अटैक, हड्डियों के रोग .

सूर्य शांति के उपाय 

चन्द्रमा –रक्त क्षीणता, कमजोरी, नेत्ररोग, दृष्टिदोष, उन्माद, मानसिक रोग, सिर दर्द, सीने का दर्द, शीत-कफजन्य बीमारी, श्वास, उलझन, मिर्गी.

चन्द्र शांति के उपाय 

मंगल– रक्त सम्बन्धी बीमारी, गुर्दे की बीमारी, पीलिया(जांडिस), कवल, रक्त, मूत्र संबधी बीमारी, मज्जा सम्बन्धी बीमारी.

मंगल शांति के उपाय 

बुध– कंठ-रोग, गल-रोग, हकलाना, श्वास, अस्थमा, आँतों के रोग, चरम रोग, दाद खाज, अपरस, फोड़ा- -फुन्सी आदि .

बुध शांति के उपाय 

बृहस्पति– सर्दी, खांसी, कफ, गले का रोग, वाणी सम्बन्धी दोष, लीवर, चर्बी, पाँव के रोग, लंगड़ापन, नितम्ब, कमर, स्तन के रोग, स्तनों का कम बढ़ना आदि.

गुरु शांति के उपाय 

शुक्र– वीर्य क्षीणता, वीर्य में शुक्राणुओं का अभाव, गला, यौन विकृतियाँ, पुरुषत्व की कमी, भौतिकता से विमुखता आदि .

शुक्र शांति के उपाय 

शनि– योनी सम्बन्धी रोग, लिंग सम्बन्धी रोग, वायु विकार, मूर्छा, हिस्टीरिया, विषपान करने के रोग, जहरीला प्रभाव आदि.

शनि शांति के उपाय 

राहु– ह्रदय रोग, कैंसर, मिर्गी, वायु विकार, बवासीर, तिल्ली के रोग, गर्मी, लू का प्रकोप, चेचक, ताप ज्वर आदि .

केतु– रक्त की कमी, खूनी दस्त, मूत्र से सम्बंधित रोग, हैजा, त्वचा सम्बन्धी रोग, नामर्दी, बवासीर अजीर्ण, मधुमेह .

अधिकांश रोग ऐसे होते हैं जो अकेले एक ग्रह के कारण नहीं होते. कभी कभी दो या दो से अधिक ग्रहों की युति जातक को विशेष रोग के प्रति संवेदनशील बना देती है. 

  •  सूर्य और चंद्र के मेल से नेत्र रोग अन्धता, ह्रदय रोग, जलंधर .
  •  सूर्य, मंगल, और केतु के योग से जोड़ों का दर्द
  •  चन्द्र, केतु और सूर्य के प्रभाव से भेंगापन .
  •  सूर्य-शुक्र के योग से गुप्त इन्द्रियों के रोग .
  • सूर्य, बुध और राहु के योग से अंतड़ियों का रोग .
  • सूर्य और शनि के योग से वायु विकार .
  • सूर्य और राहु के योग से दिल का दौरा .
  • सूर्य, शनि और बुध से दमा .
  • सूर्य, चंद्र और बुध के मेल से घबराहट .
  • सूर्य, बुद्ध और शुक्र से चर्मरोग .
  • सूर्य, शनि और राहु के योग से पोलियो हो जाता है .

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