" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

राहु सम्बंधित रोग और उपचार

ग्रहों का उपचार हम योग से भी सरलता से कर सकते है।  योगशास्त्र और ज्योतिषशास्त्र का सही से उपयोग करके मनुष्य सकारात्मक और रोग मुक्त हो सकता है। दोनों शास्रों में हाथो का प्रयोग लगभग एक लक्ष्य के लिए किया जाता है।

ग्रहों के उपचार मे रत्नों का और योग में मुद्राएं का बहुत महत्व है। जन्मकुंडली से रोग का विचार लग्नेश, द्वितीयेश, षष्ठेश, सप्टमेश, आष्ठमेश के स्वामी ग्रह, उनमें स्थित ग्रहो से, गंडमूल नक्षत्रों से भी किया जाता है। शनि की साढ़ेसाती में मनुष्य तनाव ग्रस्त, हर काम को जल्दी करने की कोशिश मे बेचैन  रहता है। ऐसी स्थिति मे योग साधना रामबाण उपाय है।

राहु से सम्बन्धित रोग और यौगिक उपाय

विष जन्य रोग, कैसर, पेट में कीड़े, उचाई से गिरना, गैस प्रॉब्लम, कनपटी की नसों में दर्द, समय पूर्व ही सिर के बाल झड़ना, फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और तब सांस लेने में तकलीफ होना, हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, तब जोड़ों का दर्द भी पैदा हो जाता है, पेट संबंधी रोग या पेट का फूलना,सिर की नसों में तनाव, बवासीर, पागलपन, निरंतर मानसिक तनाव बना रहेना, नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं, मस्तिष्क में पीड़ा और दर्द बना रहता है।

राहु व्यक्ति को पागलखाने, दवाखाने या जेलखाने भेज सकता है, राहु अचानक से भी कोई बड़ी बीमारी पैदा कर देता है और व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो जाता है, रात में सही नींद ना आना।

निम्लिखित कुछ सरल उपाय दिए गए है जो की  हर उम्र का व्यक्ति कर सकता है।

योग का और ज्योतिष का एक गहरा सम्बन्ध मानव शरीर के पंचतत्वों और त्रिदोष से जुड़ा है। जिनका सही अनुपात नही होने से रोग और जीवन में समस्या बढ़ती है इसलिए योग नित्य करना चाहिए। रोज किसी भी समय आप शांत चित्त होकर गहरी श्वास के साथ 10 से 15 मिनट  अपने  रोग से संबंधित मुद्रा और चक्र पर ग्रह सम्बंधित  मंत्र के साथ ध्यान करें

  • नाड़ी शोधन प्राणायाम
  •  मूलाधार चक्र पे ध्यान कर सकते है
  •  राहु के मंत्र के साथ, लिंग मुद्रा का ध्यान करना

दिव्याकान्ति लोकनार

AstroTips Team

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