Day: Saturday Date: 12-september-2026
Tithi: Shukla Pratipada Nakshatra: Uttara Phalguni
Yoga: Shubha Rahu Kaal: 09:10 - 10:44
More
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

एक से अधिक विवाह का योग

 

(Multiple Marriage/Relationship)

polygamy

कई लोगो के जीवन में सम्बन्ध या विवाह का योग सिर्फ एक ही नहीं होता बल्कि एक से अधिक और कई बार अनेक होता है . कई बार ऐसा देखने में आता है कि व्यक्ति एक सम्बन्ध टूटने के बाद दुसरे सम्बन्ध में पड़ता है परन्तु कई बार तो ऐसी स्थिति होती है कि व्यक्ति एक साथ ही एक से अधिक रिश्तों में रहता है . क्यों होती हैं ऐसी स्थितियां ? कौन से ग्रह और उनकी स्थितियां हैं इसके लिए जिम्मेदार आइये देखते हैं –

  • यदि सप्तमेश अपनी नीच की राशी में हो तो जातक की दो पत्नियां/सम्बन्ध  होती हैं.

  • यदि सप्तमेश , पाप ग्रह के साथ किसी पाप ग्रह की राशी में हो और जन्मांग या नवांश का सप्तम भाव शनि या बुध की राशी में हो तो दो विवाह की संभावनाएं होती हैं.

  • यदि मंगल और शुक्र सप्तम भाव में हो या शनि सप्तम भाव में हो और लग्नेश अष्टम भाव में हो तो जातक के तीन विवाह या सम्बन्ध संभव हैं.

  • यदि सप्तमेश सबल हो , शुक्र द्विस्वभाव राशि में हो जिसका अधिपति ग्रह उच्च का हो तो व्यक्ति की एक से  अधिक पत्नियां या बहुत से रिश्ते होंगे .

  • सप्तमेश उच्च का हो या वक्री हो अथवा शुक्र लग्न भाव में सबल एवं स्थिर हो तो जातक की कई पत्नियां/सम्बन्ध होंगी.

  • यदि सप्तम भाव में पाप ग्रह हो, द्वितीयेश पाप ग्रह के साथ हो और लग्नेश अष्टम भाव में हो तो जातक के दो विवाह होंगे.

  • यदि शुक्र जन्मांग या नवांश में किसी पाप ग्रह की युति में अपनी नीच की राशि में हो तो व्यक्ति के दो विवाह निश्चित हैं.

  • यदि सप्तम भाव और द्वितीय भाव में पाप ग्रह हों और इनके भावेश निर्बल हों तो जातक पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरा विवाह कर लेता है.

  • यदि सप्तम भाव और अष्टम भाव में पाप ग्रह हों मंगल द्वादश भाव में हो और सप्तमेश की सप्तम भाव पर दृष्टि न हो तो जातक की पहली पत्नी की मृत्यु  हो जाती है और वह दूसरा विवाह करता है.

  • यदि सप्तमेश और एकादशेश एक ही राशि में हों अथवा एक दुसरे  पर परस्पर दृष्टि रखते हों या एक दूसरे  से पंचम नवम स्थान में हों तो जातक के कई विवाह होते हैं.

  • यदि सप्तमेश चतुर्थ भाव में हो और नवमेश सप्तम भाव में हो अथवा सप्तमेश और एकादशेश एक दुसरे  से केंद्र में हो तो जातक के एक से अधिक विवाह होंगे.

  • यदि द्वितीय भाव और सप्तम भाव में पाप ग्रह हों तथा सप्तमेश के ऊपर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो पति/पत्नी की मृत्यु के कारण जातक को तीन या उससे भी अधिक बार  विवाह करना पड़ सकता है .

यह भी पढ़ें……..

 कब होती है विवाह होने की सबसे अधिक संभावना   प्रेम विवाह योग 
 विवाह न होने का योग   वैधव्य योग 
 विधुर योग  

 


Puja of this Month

Rashifal 2026

Copyright © 2017 astrotips.in. All Rights Reserved.
Design & Developed by : v2Web
slot88