" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे

मंगल केतु मकर राशि में 

अवधि: 2 मई 2018 से 6 नवम्बर 2018  तक

मंगल 27 जून से 28 अगस्त तक वक्री रहेगा

यह राशिफल लग्न पर आधारित है

 

मेष : प्रसिद्दी एवं मान सम्मान का योग बनेगा. यदि इस समय आपके घर किसी बालक या बालिका का जन्म होता है तो वह परिवार की कीर्ति और यश में वृद्धि करेगा. अपने समाज का मुखिया एवं बहुत प्रसिद्दी एवं नाम कमाने वाला बनेगा. उत्तम भवन एवं वाहन सुख की प्राप्ति उसे सहजता से ही हो जाएगी. संसाधनों की प्राप्ति हो सकता है आप बल पूर्वक करें. शत्रुओं का नाश करने में सफल रहेंगे तथा साहस इस समय चरम पर होगा. यदि आप पुलिस, मिलिट्री , प्रशासन , ठेकेदारी  , इन्जिनीरिंग या भूमि से सम्बंधित कार्यों में हैं तो लाभ होगा. मंगल के साथ केतु की युति आपको अपने शत्रुओं पर हावी रखेगी. पराक्रम  बढ़ा रहेगा. अचानक उतार – चढाव से सतर्क रहें माता के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता रहेगी

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वृष: वृषभ लग्न में मंगल सप्तम एवं व्यय भाव का स्वामी है. वृषभ लग्न के जातकों के लिए मंगल तथा केतु की युति नवं भाव में बनेगी. इस समय आपको सरकारी सहायता या सरकारी कार्यों में मदद मिलेगी तथा उन्नति होगी. इस समय अपने कार्यों को सिद्ध करने के लिए आप मित्र को शत्रु एवं शत्रु को मित्र बना सकते हैं. सिद्धांत एवं नैतिकता को भी आप दांव पर लगा सकते हैं. इस समय सफलता पाना ही आपका एकमात्र लक्ष्य होगा मार्ग चाहे जो  भी अपनाना पड़े. नवम भाव में बैठे मंगल की दृष्टि व्यय भाव , पराक्रम भाव एवं सुख भाव पर होगी फलस्वरूप इस समय आपका व्यय आय से अधिक होगा. पराक्रम बढ़ा हुआ रहेगा . संपत्ति की खरीद के लिए बेहतर समय होगा. परन्तु पिता के लिए समय अनुकूल नहीं है. उनको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो सकती है . मंगल केतु की युति के कारण आप अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे. क्रोध पर नियंत्रण रखें

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मिथुन: मिथुन लग्न के जातकों के लिए मंगल अष्टम भाव, मकर राशि में उच्च का है. मंगल की यह स्थिति ‘लाभ भंग‘ योग एवं ‘हर्ष‘ योग बनाएगी. इस समय आपका शत्रुओं से सामना हो सकता हिया. आप निर्भय होकर इन्साफ के लिए लड़ेंगे तथा  विजयी भी रहेंगे. भाग्य का साथ मिला जुला रहेगा , आर्थिक स्थिति भी ठीक रहेगी. कार्य व्यापार से धन लाभ की संभावनाएं बढेंगी. मंगल केतू की युति शल्य चिकित्सा की सम्भावना को प्रबल बनाती है. किसी लम्बी बिमारी की चपेट में आ सकते हैं. घटना दुर्घटना के प्रति सचेत रहें आवेश में आर्थिक फैसलों से बचें

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कर्क: इस समय धन यश एवं कीर्ति की यह सर्वोत्तम समय है. स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहेगा तथा आप किसी राजा के समान ऐश्वर्य भोगेंगे. इस समय यदि आप सरकारी नौकरी के लिए प्रयत्न करे तो सफलता की संभावना अधिक रहेगी. सरकार से सम्बंधित कार्यों में लाभ मिलेगा. इस समय बौद्धिक शक्ति अदभुद रहगी. न्याय अन्याय में आप भेद कर अपनाएंगे. पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूर्ती होगी. नए माकन को खरीदने या निवेश करने के लिए उत्तम समय है. दाम्पत्य सुख में कमी और आपसी तनाव बढ़ सकता है. संतान पराक्रमी एवं बुद्धिशाली होगी तथा संतान के कारण आपका भाग्योदय होगा.

मंगल इस समय आपके कार्य व्यापार की स्थिति उत्तम करेगा. आर्थिक स्थिति मज़बूत एवं वाणी रौबीली होगी . नेत्र विकार संभव है विशेषतः दाएं नेत्र में. यदि मंगल की दशा अन्तर्दशा चल रही हो तो भाग्योदय होगा. मंगल केतु की युति आपको विपरीत लिंगियों के प्रति आकर्षित करेगा. इस समय आपको अनैतिक कार्यों और धूर्तता से दूर रहना चाहिए. जीवन साथी के स्वास्थ्य के लिए विकट समस्या उत्पन्न होगी क्रोध की बहुत अधिकता रहेगी चोट – चपेट या सेर्जेरी की संभावना रहेगी .  

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सिंह: इस ससमय धन लाभ होगा. ऋण रोग एवं शत्रुओं का नाश होगा. मंगल के प्रभाव के कारण व्यक्तित्व प्रभावशाली रहेगा. संपत्ति में निवेश के लिए बेहतर समय है. मंगल की दृष्टि भाग्य भवन, द्वादश भाव एवं लग्न भाव पर होगी जो आपके सौभाग्य में वृद्धि करेगा. इस समय किये हुए कार्यों का उचित परिणाम निश्चित हे मिलेगा. महत्वाकांक्षा बढ़ेगी तथा स्वभाव खर्चीला रहेगा. भू संपत्ति को लेकर कोई विवाद हो सकता है. ‘सुख भंग‘ तथा ‘भाग्य भंग‘ योग के कारण आपको प्रथम प्रयास में सफलता नहीं मिलेगी . सफलता के लिए बार बार प्रयास करने होंगे. यदि मंगल की दशा अन्तर्दशा भी चल रही है तो भाग्य चमकेगा , पराक्रम बढेगा एवं पर्तिश्रम का लाभ मिलेगा. मंगल केतु की युति स्वास्थ्य के लिए हानि कारक है. रोग में वृद्धि हो सकती है अतः सतर्क रहें. साथ ही माता के स्वास्थ्य के लिए भी यह हानिकारक हो सकता है

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कन्या : इस समय मंगल के प्रभाव के कारण आप एक ही समय में बहुत से कार्यों को करने का प्रयास करेंगे तथा सफल भी रहेंगे. बौद्धिक क्षमता अदभुद रहेगी . यदि किसी परीक्षा या इंटरव्यू के लिए तयारी कर  रहें हैं तो सफलता की सम्भावन अधिक रहेगी. मन चंचल हो सकता है. सेक्स के प्रति रुझान अधिक रहेगा पंचम भाव के मंगल की दृष्टि अष्टम भाव , एकादशा भाव एवं द्वादश भाव पर होगी जो आपकी आयु को बढाती है.

शारीरिक कश्मता बेहतर होगी. जो जातक राजनीति क्षेत्र में हैं उनका वर्चस्व बढेगा. यात्रयों का योग बनेगा तथा स्वभाव खर्चीला होगा. गर्भवती स्त्रियों के लिए समय कष्टपूर्ण रहेगा. मंगल केतु की युति संतान के लिए कष्टकारी होगी. केतु की उपस्थिति आवेश और क्रोध बहुत अधिक बढ़ाएगी . आवेश में आकर निर्णय लेने से बचें.

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तुला: तुला लग्न के जातक इस समय राजा तुल्य ऐश्वर्य , वैभव एवं सम्पन्नता अनुभव करेंगे. इस समय किसी बड़ी भूमि या भवन की खरीद संभव है. सभी प्रकार के भौतिक सुख एवं नौकर चाकर  इस समय आपके पास होंगे. चतुर्थ भाव में बैठे मंगल की दृष्टि सप्तम भाव , दशम भाव एवं लाभ भाव पर पड़ेगी. फलस्वरूप पैत्रिक संपत्ति एवं सरकारी कार्यों से लाभ प्राप्त होगा.

कार्य व्यापर में लाभ एवं वर्चस्व बनेगा. परन्तु ‘मांगलिक‘ योग के कारण जीवन साथी से मन मुटाव की स्थिति बनेगी. आप अपने कार्यों में किसी का भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे. यदि मंगल की दशा अन्तर्दशा भी चल रही है तो भूमि भवन एवं वाहन का पूर्ण सुख प्राप्त होगा. मंगल केतु की युति माता के सुख में कमी करेगी. दुर्घटना की सम्भावना सतर्क सावधान रहे. माता – पिता में विवाद की संभावना उत्पन्न हो सकती है

वृश्चिक : मंगल के उच्च राशि में होने के कारण आपका पराक्रम एवं साहस बढेगा . इस समय आप अपने कर्तव्यों के प्रति बहुत सजग रहेंगे . मंगल की यह स्थिति आपको बहुत उर्जावान बनाएगी . भाई या भाई तुल्य मित्रों का साथ एवं सहयोग मिलेगा. परन्तु इस समय क्रोध पर नियंत्रण आवश्यक है क्योंकि आपको अनावश्यक क्रोध आएगा जिसके कारण संबंधों में द्वेष की भावना आएगी.

मंगल की दृष्टि छठे भाव , भाग्य भवन एवं दशम भाव पर होगी अतः शत्रुओं का नाश कर्ब्ने में आप सक्षम रहेंगे. भाग्य का साथ बना रहेगा. सरकारी क्षेत्र के कार्यों में मदद एवं लाभ मिलेगा. यदि मंगल की दशा अन्तर्दशा चल रही है तो शुभ फलों की प्राप्ति होगी उन्नति के अवसर मिलेंगे. मंगल केतु की युति के कारण भाइयों से अनावश्यक तनाव बढेगा जिसका प्रभाव संतान को भी झेलना पड़ सकता है. खुद से कोई बड़ा अपराध हो सकता है सतर्क रहें.

धनु : मंगल अपनी उच्च राशि में होगा फलस्वरूप आपको धन लाभ की अधिक सम्भावना रहेगी परन्तु आय अधिक व्यय भी होगा ही  .पारिवारिक एवं दाम्पत्य सुख एवं यश में वृद्धि होगी. नेत्र विकार की संभावना है विशेषतः बाएं नेत्र में द्वितीय भाव के मंगल की दृष्टि पंचम भाव , अष्टम भाव एवं भाग्य भाव पर पड़ने के कारण संतान सुख उत्तम रहेगा. धनु लग्न के जातकों की संतान उनके भाग्योदय में सहायक होगी. यदि मंगल की दशा अन्तर्दशा चल रही है तो आपका भाग्योदय होगा तथा शत्रुओं का नाश होगा. मंगल केतु की युति आपको रहस्यमय बनाएगी  तथा आप बातों को गुप्त रखने का प्रयास करेंगे. विरोधियों पर बहुत घातक हो सकते हैं. छठी इन्द्रिय जागृत रहेगी. वाणी कभी – कभी बहुत कठोर हो सकती है

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मकर: मंगल की यह स्थिति आपकी वाणी को प्रभावशाली एवं ओजस्वी बनाएगी.  इस समय आप ऐश्वर्यशाली जीवन जियेंगे. लग्न में मंगल के कारण मांगलिक योग बनेगा अतः विवाह में देरी संभव है. उपयुक्त जीवन साथी के चुनाव मे कठिनाई आएगी. यदि विवाहित हैं तो जीवन साथी से मतभेद होने की संभावना बनेगी. यदि मंगल की दशा अन्तर्दशा भी चल रही है तो आको भौतिक उपलब्धियों की प्राप्ति होगी. मंगल केतु की युति के कारण आपके शत्रु आपसे डरेंगे तथा आप उनका नाश करने में सक्षम होंगे. जीवन साथी के लिए बेहद कठिन समय हो सकता है. साझेदारों से बहुत विवाद की सम्भावना रहेगी

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कुंभ: द्वादश भाव में मंगल उच्च का है तथा कुंडली में ‘पराक्रम भंग‘ एवं ‘राजभंग‘ योग बनेगा. फलस्वरूप वैवाहिक जीवन में कष्ट होगा. व्यसन की ओर आपका रुझान बढेगा. दायीं आँख में परेशानी हो सकती है. इस समय विदेश यात्राएं लाभदायक होंगी. मित्रों से धोखा मिलने की संभावना बनेगी. अपनी गोपनीय बातों को सभी के साथ सांझा न करे. शत्रु नष्ट होंगे परन्तु जीवन साथी के साथ वैचारिक मतभेद बने रहेंगे. मंगल की यह स्थिति आपकी ज्येष्ठ संतान के लिए हानि कारक है अतः सतर्क रहें. मंगल की दशा अन्तर्दशा  अशुभ फलदायी रहेगी. मंगल केतु की युति आपको धार्मिकता की ओर रुझान कराएगी आप सिद्धांतों पर चलना पसंद करेंगे परन्तु साथ ही यह युति आपको डरपोक बनाएगी भय उत्पन्न होगा

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मीन: मीन लग्न के जातकों के लिए मंगल केतु की युति एकादश भाव में बनेगी. मकर राशि में मंगल उच्च का है फलस्वरूप मंगल आपको धन लाभ कराएगा. व्यापार व्यवसाय में आशा से अधिक उन्नति एवं आय के योग बनेंगे परन्तु मंगल केतु की युति स्थायी लाभ में बाधक होगी. मंगल आपको धार्मिक एवं भक्ति भाव देगा . एकादश भाव का मंगल आपके धन भाव , पंचम भाव एवं छठे भाव पर दृष्टि डालेगा. फलतः वाणी में कठोरता एवं अभिमान आना स्वाभाविक है. वाणी के कारण संबंधों में कडवाहट आ सकती है. पारिवारिक सुख में कमी आएगी. शिक्षा में व्यवधान उत्पन्न होगा. गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत अधिक कठिनाई उतपन्न होगी. मंगल की दशा अन्तर्दशा में व्यापार बढेगा तथा धन लाभ होगा. परिवार के साथ यात्राएं संभावित है. धन प्राप्ति या लाभ अचानक होगा. 

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By : Pt Deepak Dubey


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