" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

Mars Retrograde In Scorpio/ Mars Retrograde

In Vrishchik Rashi 

वक्री मंगल का वृश्चिक राशि में गोचर/

वक्री मंगल वृश्चिक राशि में

17 अप्रैल (रविवार ), 2016 

17 जून,  2016 को तुला में प्रवेश वक्री अवस्था में ही

29 जून, 2016 को तुला में मार्गी

12 जुलाई, 2016 को पुनः मार्गी अवस्था में वृश्चिक  में प्रवेश

18 सितम्बर, 2016 तक वृश्चिक में और उस दिन पुनः मंगल का धनु राशि  में प्रवेश 

आग और पानी दोनों ही उगलेगा यह मंगल .. हादसों का समय ..

वक्री मंगल का वृश्चिक राशि में गोचर तथा आपकी राशि पर प्रभाव 

देखें विडियो -पार्ट 1

मेष : लग्नेश और अष्टमेश अष्टम भाव में वक्री हो रहा है अतः वैवाहिक जीवन कष्टकर , परिश्रम निरर्थक , अनावश्यक के विवाद , स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी

देखें विडियो -पार्ट 2

वृष : सप्तमेश और द्वादशेश सप्तम भाव में वक्री तथा शनि भी वक्री. दो वक्री ग्रहों का मेल अतः अत्यंत ही संवेदनशील समय दर्शाता है तथा इसकी शरीर पर दृष्टि भी रहेगी   अतः  स्वास्थ्य कमजोर रहेगा.  वैवाहिक जीवन को संभाले , जीवन साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें , करीबियों से मतभेद , भाग्य पक्ष कमजोर तथा  उच्च अधिकारीयों से तनाव की आशंका.

” मई 2016 का राशिफल” जानने के लिए क्लिक करें 

मिथुन : लाभेश और षष्टेश मंगल छठे भाव में वक्री. धन लाभ अधिक मात्रा में होगा.  शत्रु से लगातार परेशानी  परन्तु अंतिम विजय आपकी रहेगी. गंभीर चोट – चपेट की संभावना  , रक्त और पेट सम्बन्धी समस्या . ऑपरेशन की संभावना , लम्बे समय के रोग को अब नहीं टाल पाएंगे. विकराल रूप ले सकता है

कर्क : दशमेश और पंचमेश मंगल पंचम भाव में वक्री साथ ही शनि कि युति , सोच में उग्रता और शिथिलता दोनों ही रहेगी.  बड़े अधिकारीयों से तनाव , संतान को कष्ट , चोट – चपेट की सम्भावना , गर्भवती महिलाऐं बेहद सतर्क रहें .

वैदिक पूजा /अनुष्ठान कराने हेतु यहाँ क्लिक करें !

सिंह : चतुर्थेश और भाग्येश मंगल चतुर्थ भाव में ही वक्री , दो क्रूर ग्रह चतुर्थ भाव में वक्री अतः स्वास्थ्य को लेकर बेहद सतर्कता की आवश्यकता , पारिवारिक सुख में कमी , बड़े – बुजुर्गों को खतरा , माता – पिता को कष्ट संभावित , वैवाहिक  जीवन में बहुत तनाव.

कन्या : तीसरे और अष्टम भाव का स्वामी तीसरे भाव में वक्री, अतः  करीबी लोगो से धोखा , भाइयों से तनाव संभावित  , भाग्य पक्ष बेहद कमजोर , अनावश्यक का  वाद – विवाद , स्नायु तंत्र में समस्या , शरीर के निचले हिस्से का विशेष ध्यान रखें.

ph iconBook Your Telephonic Consultancy with Pt Deepak Dubey in just Rs 2100/-  Click here

तुला : दूसरे और सप्तम भाव का स्वामी दूसरे भाव में वक्री और शनि भी , आर्थिक स्थिति अनियंत्रित , वाणी कड़वी और कठोर , अचानक गलत संगत की संभावना , धन की बचत संभव  नहीं , जमीन से सम्बन्धीत नए कार्यों में बिल्कुल हाथ ना डाले .

वृश्चिकअत्यंत ही सवेदनशील समय , घटना – दुर्घटना का प्रबल योग बनेगा , सभी कार्य धीमे होंगे और उसके बाद बंद , बहुत धैर्य की आवश्यकता पड़ेगी . जीवन साथी से तनाव चरम पर होगा , कुछ लोगों का विवाह विच्छेद भी हो सकता है , स्थान परिवर्तन का योग भी बनेगा , उपचार का सहारा लें.

Now you can Have “Shani Sade Saati Report” By Mail Also. In Just Rs 1500/- Click Here

धनु : धन की आवक बहुत बढ़ेगी , परन्तु मन स्थिर नहीं रहेगा , करीबी लोगों से विवाद हो सकता है , यात्रा कष्टकारी होगी परन्तु सुदूर के कार्यों में लाभ भी होगा . संतान के मामले में कुछ परेशानी संभव है . शिक्षा के लिए यह समय अच्छा नहीं है.  थोडा ठहरें

मकरचतुर्थ और एकादश भाव का स्वामी एकादश भाव में वक्री , खूब धन का लाभ , अचानक और अप्रत्याशित धन प्राप्त होने की सम्भावना परन्तु वैसे ही जाने के मार्ग भी खुले रहेंगे. अचानक विवाद की स्थिति भी बनेगी . जिनकी कुंडली में मंगल जन्म के समय भी ख़राब हो उन लोगों से कोई अपराध हो सकता है आवेश में आने से बचें , साथ ही शिक्षा में रुकावट , संतान को कष्ट , गर्भवती महिलायें बेहद सतर्कता बरतें .

वैवाहिक जीवन में समस्या हो तो “माँ कात्यायनी अनुष्ठान” के लिए यहाँ क्लिक करें

 कुम्भतीसरे और दशम भाव का स्वामी मंगल दशम भाव में वक्री , मान – अपमान की स्थिति , कोर्ट कचहरी से सावधान , कोई केस – मुकदमा है तो कारागार का भय हो सकत है , पहले ही सावधानी बरतें या उपचार करें , अपने उच्च अधिकारियों से बेहद सावधानी से पेश आयें , अपने भावों को अपने नियंत्रण में रखें , स्थान परिवर्तन के लिए यह समय बिलकुल ही अच्छा नहीं .

मीनलाभेश और भाग्येश मंगल भाग्य स्थान पर वक्री , हर कार्य में अवरोध , अनावश्यक के व्यय , धन की बचत संभव नहीं , माँ  के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें खुद भी उच्च रक्त चाप के मरीज हैं तो सावधान रहें , उग्रता और गलत सांगत से दूर रहें .

बुध से सम्बंधित उपचार :

  • गाय को हरा चारा खिलाएं
  • गणेश भगवान् को दूब अर्पित करें और उनकी आराधना करें
  • बुध कुंडली में वक्री हों तो परिणामों को विपरीत समझें
  • बुध कमजोर हो तो हरी सब्जियों का सेवन करें
  • अत्यधिक परेशानी की अवस्था में बुध की वैदिक शांति “ कराएँ

पढ़िए  वर्ष 2016 में पड़ने वाले “शुभ एवं अशुभ योग               सूर्य का मेष राशि में गोचर पढ़िए सभी राशियों पर प्रभाव 

जानिए सिंहस्थ कुम्भ की स्नान तिथियाँ                     संकट नाशन गणेश स्तोत्र                        ऋण मोचक मंगल स्तोत्र 


Puja of this Month
New Arrivals
Copyright © 2017 astrotips.in. All Rights Reserved.
Design & Developed by : v2Web