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ऋषि ने बहुत सोच विचार कर राजा को सबसे सुगम और शीघ्र फलदाता मोक्षदा एकादशी व्रत के विधि विधान और महत्व को बताया . राजा ने ऋषि के कहे अनुसार कुटुंब सहित मोक्षदा एकादशी का व्रत करके उसका फल अपने पिता को अर्पण किया और व्रत के प्रभाव से राजा के पिता ने मोक्ष प्राप्त किया और स्वर्ग चले गये.