" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

मोक्षदा एकादशी कथा/ Mokshda Ekadashi Katha

 

Indira-ekadashi

प्राचीन काल में गोकुल नगर में वैखानस नाम का रजा हुआ जो स्वभाव से बहुत ही धार्मिक था. एक बार रात्रि में उसने स्वप्न में अपने पूज्य पिता को नरक भोगते हुए देखा. प्रातः काल राजा ने  ज्योतिषी और वेद पाठी ब्राह्मणों से पूछा  कि ” मेरे पिता का उद्धार कैसे होगा?” ब्राह्मण बोले यहाँ समीप ही पर्वत ऋषि का आश्रम है, उनकी शरणागत से आपके पिता शीघ्र ही स्वर्ग चले जायेंगे. राजा पर्वत ऋषि के आश्रम शीघ्र ही गये . सादर प्रणाम करके अपने स्वपन के बारे में ऋषि को बताया और  उनसे अपने योग बल के माध्यम से अपने पिता की मुक्ति का मार्ग जानने की विनती की .

ऋषि ने बहुत सोच विचार कर राजा को सबसे सुगम और  शीघ्र फलदाता मोक्षदा एकादशी  व्रत के विधि विधान और महत्व को बताया . राजा ने ऋषि के कहे अनुसार कुटुंब सहित मोक्षदा  एकादशी का व्रत करके उसका फल अपने पिता को अर्पण किया और व्रत के प्रभाव से राजा के पिता ने मोक्ष प्राप्त किया और स्वर्ग चले गये.

 

 

    <उत्त्पन्ना  एकादशी                                                एकादशी 2017                                                    सफला एकादशी >
  < Uttpanna Ekadashi                                     Ekadashi 2017                                                Safla Ekadashi>

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