" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे

Uttpanna Ekadashi/ Uttpanna Ekadashi Vrat/ उत्त्पन्ना एकादशी/उत्त्पन्ना एकादशी व्रत 

14 नवम्बर (मंगलवार) 2017

3 दिसम्बर (सोमवार) 2018

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उत्त्पन्ना एकादशी का पौराणिक महत्व 

मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी उत्त्पन्ना एकादशी के नाम से जानी जाती है.  इस व्रत का प्रभाव देवताओं को भी दुर्लभ है। रात्रि को भोजन करने वाले को  तथा  दिन में एक बार भोजन करने वाले को आधा ही फल प्राप्त होता है जबकि निर्जल व्रत रखने वाले का माहात्म्य तो देवता भी वर्णन नहीं कर सकते।

व्रत विधिपुराणों के अनुसार दशमी तिथि  को  शाम में सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए और रात्रि में भगवान का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। एकादशी का व्रत रखने वाले को अपना मन को शांत एवं स्थिर रखें. किसी भी प्रकार की द्वेष भावना या क्रोध मन में न लायें. परनिंदा से बचें.

प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करे तथा स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान् विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीप जलाएं. भगवान् विष्णु की पूजा में  तुलसी, ऋतु फल एवं तिल का प्रयोग करें। व्रत के दिन अन्न वर्जित है. निराहार रहें और शाम में पूजा के बाद चाहें तो फल ग्रहण कर सकते है. यदि आप किसी कारण व्रत नहीं रखते हैं तो भी  एकादशी के दिन चावल का प्रयोग भोजन में नहीं करना चाहिए।

एकादशी के दिन रात्रि जागरण का बड़ा महत्व है। संभव हो तो रात में जगकर भगवान का भजन कीर्तन करें। एकादशी के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मण भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करें।

सागर: इस दिन गुड और बादाम का सागार लेना चाहिए.

फल: इस दिन भगवान् विष्णु के अवतार भगवान् श्री कृष्ण की पूजा का विधान है. संक्रांति से 4 लाख गुना तथा सूर्य-चंद्र ग्रहण में स्नान-दान से जो पुण्य प्राप्त होता है, वही पुण्य उत्त्पन्ना एकादशी के दिन व्रत करने से मिलता है। एक हजार यज्ञों से भी ‍अधिक एकादशी व्रत का फल माना जाता  है।

उत्त्पन्ना  एकादशी कथा/ Uttppanna Ekadashi Katha

 

    <प्रबोधिनी  एकादशी                                             एकादशी 2017                                                 मोक्षदा एकादशी >
  < Prabodhini Ekadashi                             Ekadashi 2017                               Mokshda Ekadashi>

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