वैदिक ज्योतिष में राहु महत्त्वाकांक्षा, भ्रम, असंतोष, विदेशी संपर्क, आधुनिक तकनीक, शोध, राजनीति और अचानक होने वाले परिवर्तनों से जुड़ा छाया ग्रह माना जाता है। जन्मकुंडली में राहु की स्थिति व्यक्ति की इच्छाओं, विचारों, निर्णयों, संबंधों और उपलब्धियों की दिशा को प्रभावित करती है।
“राहु” पुस्तक में राहु से संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों और सनातन उपासना-पद्धतियों को सरल, व्यावहारिक एवं संतुलित भाषा में समझाया गया है। यह पुस्तक केवल राहु के सामान्य फल नहीं बताती, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि अलग-अलग लग्न, राशि, भाव, राशि स्वामी, युति, अन्य ग्रहों की दृष्टि, दशा और गोचर के अनुसार राहु के परिणाम क्यों बदल जाते हैं।
पुस्तक में आवश्यक स्थानों पर “दीपक दूबे की विशेष टिप्पणी” के माध्यम से अनुभव आधारित विचार भी प्रस्तुत किए गए हैं। किसी एक ग्रह स्थिति को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय पूरी जन्मकुंडली में राहु की भूमिका समझने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
यह पुस्तक सामान्य पाठकों, ज्योतिष के विद्यार्थियों और अपनी जन्मकुंडली में राहु की वास्तविक भूमिका को समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। इसमें भय उत्पन्न करने के स्थान पर सही ज्योतिषीय जानकारी, उचित कर्म, विवेक, अनुशासन, संतुलित उपाय और सनातन उपासना को प्राथमिकता दी गई है।
लेखक: पं. दीपक दूबे
23 विस्तृत अध्याय • 106 पृष्ठ • हिंदी डिजिटल PDF • मूल्य ₹249
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