वैदिक ज्योतिष में केतु अनासक्ति, अंतर्दृष्टि, आध्यात्मिक रुचि, गहन अध्ययन और मोक्ष का कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में उसका प्रभाव व्यक्ति की कल्पनाशक्ति, निर्णय, संबंधों, काम में रुचि और जीवन को समझने के ढंग में दिखाई दे सकता है। अनुकूल स्थिति में यही प्रभाव विशेषज्ञता, सृजन और साधना की दिशा दे सकता है; अशुभ संबंध में आवेग, आशंका, असंतोष या अनावश्यक दूरी बढ़ सकती है।
“केतु” पुस्तक में केतु से संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों और सनातन उपासना-पद्धतियों को सरल, व्यावहारिक और संतुलित भाषा में समझाया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि राशि, भाव, लग्न, राशि स्वामी, युति, केतु पर अन्य ग्रहों की दृष्टि, दशा और गोचर के अनुसार उसके परिणाम क्यों बदलते हैं।
पुस्तक में पं. दीपक दूबे की विशेष टिप्पणियाँ अनुभव आधारित विचारों को अलग बॉक्स में प्रस्तुत करती हैं। सामान्य जीवन के उदाहरणों से समझाया गया है कि केतु का प्रभाव केवल अलगाव तक सीमित नहीं है—वह जिम्मेदार अनासक्ति, गहरी समझ और रचनात्मक क्षमता के रूप में भी उभर सकता है।
यह पुस्तक सामान्य पाठकों, ज्योतिष के विद्यार्थियों और अपनी जन्मकुंडली में केतु की भूमिका समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। इसमें भय के स्थान पर स्पष्ट ज्योतिषीय समझ, उचित कर्म, दैवी कृपा और सनातन साधना को प्राथमिकता दी गई है। पूजा और अनुष्ठानों को सुधार में सहायक सुझावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
23 विस्तृत अध्याय • 97 पृष्ठ • हिंदी डिजिटल PDF • मूल्य ₹249
अभी डाउनलोड करें
भुगतान के बाद पुस्तक PDF प्रारूप में डाउनलोड के लिए उपलब्ध होगी। यह डिजिटल प्रति केवल खरीदार के व्यक्तिगत उपयोग हेतु है।
No reviews yet. Be the first to review this eBook!
Only customers who have purchased this eBook can submit a review. Please use the same email address you used at checkout.