" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey
शनि का संपूर्ण ज्योतिषीय ज्ञान — राशि, भाव, दशा, गोचर, योग और उपाय Hindi Edition
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शनि का संपूर्ण ज्योतिषीय ज्ञान — राशि, भाव, दशा, गोचर, योग और उपाय

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नवग्रह ज्ञान श्रृंखला — शनि

शनि का संपूर्ण ज्योतिषीय ज्ञान

कर्म, न्याय, अनुशासन, दशा, गोचर और उपासना का विस्तृत विवेचन

वैदिक ज्योतिष में शनि कर्म, न्याय, अनुशासन, धैर्य, श्रम और स्थायी परिणामों का प्रमुख कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में शनि की स्थिति व्यक्ति के कार्यक्षेत्र, जिम्मेदारियों, आय, संबंधों और जीवन में मिलने वाली उपलब्धियों को प्रभावित करती है। अनुकूल स्थिति में शनि परिश्रम को सफलता, अनुभव को परिपक्वता और कार्य को स्थिरता देता है। अशुभ प्रभाव में संबंधित जीवन-क्षेत्र में विलंब, बाधाएँ, असंतोष और कठोरता बढ़ती है।

“शनि” पुस्तक में शनि से संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों और सनातन उपासना की जानकारी सरल, स्पष्ट और पाठकों के लिए सहज भाषा में प्रस्तुत की गई है। इसमें समझाया गया है कि राशि, भाव, लग्न, भाव-स्वामित्व, ग्रहबल, युति, दृष्टि, दशा और गोचर के अनुसार शनि के परिणाम क्यों बदलते हैं।

इस पुस्तक में आप जानेंगे

  • शनि का ज्योतिषीय स्वरूप, कारकत्व और जीवन पर प्रभाव
  • कर्मफल, न्याय, समय और उत्तरदायित्व से शनि का संबंध
  • कालपुरुष की कुंडली में कर्म और आय से जुड़ा लेखक का दृष्टिकोण
  • बारह राशियों और बारह भावों में शनि के विस्तृत परिणाम
  • शनि की स्वराशि, उच्च–नीच राशि और मूलत्रिकोण का महत्व
  • सभी लग्नों में शनि का भाव-स्वामित्व और योगकारक भूमिका
  • शुभ, अशुभ, बलवान, निर्बल और पीड़ित शनि के संकेत
  • शनि की तीसरी, सातवीं और दसवीं दृष्टि के परिणाम
  • सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, राहु और केतु के साथ शनि की युति
  • मेष में उच्च सूर्य और नीच शनि की विशेष स्थिति
  • मकर में शनि–मंगल तथा तुला में शनि–शुक्र की युति
  • शश महापुरुष योग, राजयोग और अन्य शुभ ग्रह-संबंध
  • शनि–चंद्रमा का विष योग तथा शनि से जुड़े अन्य अशुभ योग
  • शनि–चंद्रमा–केतु के शापित दोष पर लेखक की विस्तृत विशेष टिप्पणी
  • शनि–चंद्रमा–राहु और अन्य त्रिग्रही युतियों के परिणाम
  • शनि–गुरु–केतु के संबंध से बनने वाले आध्यात्मिक संकेत
  • शिक्षा, भाई-बहन, करियर, आय, संपत्ति, विवाह और स्वास्थ्य से जुड़े संकेत
  • शनि की महादशा और सभी अंतरदशाओं के व्यावहारिक परिणाम
  • शनि का गोचर तथा साढ़ेसाती और ढैया का संक्षिप्त परिचय
  • नीलम, सातमुखी रुद्राक्ष, शनि यंत्र और अन्य उपायों की उपयुक्तता
  • शनिवार, दान, सेवाभाव और शनि संबंधी उपासना का महत्व
  • हनुमान, शिव और कृष्ण की आराधना से शनि का अनुभव आधारित संबंध
  • शनि के नाम मंत्र, बीज मंत्र, वैदिक मंत्र और गायत्री
  • शनि स्तुति, पिप्पलादकृत लघु स्तोत्र, दशरथकृत स्तुति और अष्टोत्तरशतनामावली
  • शनि वज्रपञ्जर कवच और श्रीमहाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र
  • शनि से जुड़े प्रचलित भ्रमों और पाठकों के सामान्य प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर

पुस्तक में पं. दीपक दूबे की विशेष टिप्पणियाँ अनुभव आधारित विचारों को अलग बॉक्स में प्रस्तुत करती हैं। सेवा, समभाव और निष्काम कर्म से शनि की आराधना का संबंध लेखक के दृष्टिकोण से समझाया गया है। मंत्र, स्तुति, स्तोत्र और कवच के मूल पाठ स्पष्ट शीर्षकों के साथ व्यवस्थित बॉक्स में दिए गए हैं।

यह पुस्तक सामान्य पाठकों, ज्योतिष के विद्यार्थियों और अपनी जन्मकुंडली में शनि की वास्तविक भूमिका समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। इसमें भय के स्थान पर स्पष्ट ज्योतिषीय समझ, उचित कर्म, दैवी कृपा और सनातन उपासना को प्राथमिकता दी गई है। पूजा और ग्रहशांति को अशुभ प्रभावों के शमन तथा शुभता की वृद्धि में सहायक उपासनाओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

23 विस्तृत अध्याय • 112 पृष्ठ • हिंदी डिजिटल PDF • मूल्य ₹249

अपनी कुंडली में शनि की वास्तविक भूमिका को समझिए

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