वैदिक ज्योतिष में गुरु, अर्थात बृहस्पति, ज्ञान, विवेक, धर्म, उच्च शिक्षा, संतान, धन और मार्गदर्शन का प्रमुख कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में उसका प्रभाव व्यक्ति की समझ, मान्यताओं, निर्णय, पारिवारिक जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा में दिखाई देता है। अनुकूल गुरु विद्वत्ता, योग्य मार्गदर्शन और उन्नति देता है; अशुभ ग्रह-संबंध में अत्यधिक अपेक्षाएँ, गलत निर्णय, संबंधों में दूरी और निजी संतोष की कमी सामने आती है।
“गुरु” पुस्तक में बृहस्पति से संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों और सनातन उपासना को सरल, सहज और व्यावहारिक हिंदी में समझाया गया है। राशि, भाव, लग्न, भाव-स्वामित्व, ग्रहबल, युति, दृष्टि, दशा और गोचर के आधार पर स्पष्ट किया गया है कि गुरु के परिणाम अलग-अलग कुंडलियों में क्यों बदलते हैं। जीवन के उदाहरण इन परिणामों को समझने में सहायता देते हैं।
पुस्तक में पं. दीपक दूबे की विशेष टिप्पणियाँ उनके अनुभव आधारित विचारों को अलग बॉक्स में प्रस्तुत करती हैं। इनमें ज्ञान और आचरण, सामाजिक सम्मान और निजी सुख, रिश्तों की निकटता तथा आध्यात्मिक जीवन से जुड़े विषयों का स्पष्ट विवेचन है।
यह पुस्तक सामान्य पाठकों, ज्योतिष के विद्यार्थियों और अपनी जन्मकुंडली में गुरु की भूमिका समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। इसमें भय उत्पन्न करने के बजाय स्पष्ट ज्योतिषीय समझ, उचित कर्म, दैवी कृपा और सनातन उपासना को प्राथमिकता दी गई है। पूजा और अनुष्ठानों को अशुभ प्रभावों के शमन तथा शुभता की वृद्धि में सहायक बताया गया है।
23 विस्तृत अध्याय • कवर सहित 114 पृष्ठ • हिंदी डिजिटल PDF • मूल्य ₹249
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