वैदिक ज्योतिष में बुध बुद्धि, वाणी, तर्क, गणना, संवाद, लेखन और व्यापार का प्रमुख कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में बुध की स्थिति व्यक्ति के सोचने, समझने, बोलने, निर्णय लेने और अपने ज्ञान का उपयोग करने के ढंग को प्रभावित करती है। शुभ प्रभाव वाला बुध इन क्षमताओं को विकसित करता है। बुध निर्बल हो या उस पर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो बोलने, समझने, गणना करने और निर्णय लेने में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
“बुध” पुस्तक में बुध से संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों और सनातन उपासना-पद्धतियों को सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक हिंदी में समझाया गया है। इसमें राशि, भाव, लग्न, भाव-स्वामित्व, ग्रहबल, युति, दृष्टि, दशा और गोचर के आधार पर बुध के अलग-अलग परिणामों का विस्तृत विवेचन है।
पुस्तक में पं. दीपक दूबे की विशेष टिप्पणियाँ उनके अनुभव आधारित विचारों को अलग बॉक्स में प्रस्तुत करती हैं। इनमें स्पष्ट किया गया है कि बुध जिन क्षमताओं को विकसित करता है, अशुभ प्रभाव में उन्हीं से संबंधित समस्याएँ भी उत्पन्न करता है। इसलिए बुध के परिणाम समझने में उसकी पूरी ज्योतिषीय स्थिति का महत्व है।
यह पुस्तक सामान्य पाठकों, ज्योतिष के विद्यार्थियों और अपनी जन्मकुंडली में बुध की भूमिका समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। इसमें भय के स्थान पर स्पष्ट ज्योतिषीय जानकारी, उचित कर्म, दैवी कृपा और सनातन उपासना को प्राथमिकता दी गई है।
23 विस्तृत अध्याय • 103 पृष्ठ • हिंदी डिजिटल PDF • मूल्य ₹249
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