वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा मन, माता, संवेदना, स्मृति, भावनात्मक संतुलन, जनजीवन, पोषण और मानसिक शांति का प्रमुख कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के स्वभाव, मनोबल, पारिवारिक सुख, निर्णय लेने की प्रवृत्ति, संबंधों और बदलती परिस्थितियों के प्रति उसकी प्रतिक्रिया को गहराई से प्रभावित करती है।
“चंद्रमा” पुस्तक में चंद्र ग्रह से संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों और सनातन उपासना-पद्धतियों को सरल, व्यावहारिक एवं संतुलित भाषा में समझाया गया है। यह पुस्तक केवल चंद्रमा के सामान्य फल नहीं बताती, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि अलग-अलग लग्न, राशि, भाव, पक्षबल, युति, दृष्टि, दशा और गोचर के अनुसार चंद्रमा के परिणाम क्यों बदल जाते हैं।
यह पुस्तक सामान्य पाठकों, ज्योतिष के विद्यार्थियों और अपनी जन्मकुंडली में चंद्रमा की वास्तविक भूमिका को समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। इसमें भय उत्पन्न करने के स्थान पर सही ज्योतिषीय जानकारी, उचित कर्म, संतुलित उपचार, दैवी कृपा और सनातन साधना को प्राथमिकता दी गई है।
21 विस्तृत अध्याय • 75 पृष्ठ • हिंदी डिजिटल PDF • मूल्य ₹249
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