वैदिक ज्योतिष में मंगल साहस, पराक्रम, ऊर्जा, इच्छाशक्ति, भूमि, संपत्ति, भाई-बहन, तकनीकी कार्य और संघर्ष का प्रमुख कारक माना जाता है। जन्मकुंडली में मंगल की स्थिति व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णयों, प्रतिस्पर्धा, क्रोध, संबंधों और चुनौतियों का सामना करने की प्रवृत्ति को प्रभावित करती है।
“मंगल” पुस्तक में मंगल ग्रह से संबंधित ज्योतिषीय सिद्धांतों और सनातन उपासना-पद्धतियों को सरल, व्यावहारिक एवं संतुलित भाषा में समझाया गया है। यह पुस्तक केवल मंगल के सामान्य फल नहीं बताती, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि अलग-अलग लग्न, राशि, भाव, भाव-स्वामित्व, युति, दृष्टि, दशा और गोचर के अनुसार मंगल के परिणाम क्यों बदल जाते हैं।
पुस्तक में मांगलिक दोष को भय का कारण बनाने के बजाय उसके वास्तविक ज्योतिषीय आधार को समझने पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंगल की किसी एक स्थिति से अंतिम निष्कर्ष निकालने के स्थान पर जन्मकुंडली के अन्य ग्रह संबंधों और सहायक परिस्थितियों को भी समझाया गया है।
यह पुस्तक सामान्य पाठकों, ज्योतिष के विद्यार्थियों और अपनी जन्मकुंडली में मंगल की वास्तविक भूमिका को समझने वाले जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी है। इसमें सही ज्योतिषीय जानकारी, उचित कर्म, संयम, अनुशासन, संतुलित उपाय और सनातन उपासना को प्राथमिकता दी गई है।
लेखक: पं. दीपक दूबे
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