Day: Thursday Date: 13-august-2026
Tithi: Shukla Pratipada Nakshatra: Magha
Yoga: - Rahu Kaal: 14:05 - 15:44
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" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है " - पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

Mrit Sanjeevani Anushthan

मृत संजीवनी अनुष्ठान

जब किसी भी कारण से व्यक्ति के ऊपर अकाल मृत्यु का या मृत्यु तुल्य कष्ट का खतरा मडराने लगा हो तथा स्तिथि बेहद संवेदनशील हो जाए तो “मृत संजीवनी” मन्त्र का अनुष्ठान, मन्त्रों के माध्यम से उपचार करने का एकमात्र रास्ता रह जाता है. ऐसा कहा जाता है कि यदि स्वयं शिव ने ही मृत्यु सुनिश्चित ना कर दी हो तो इस मन्त्र में, यमराज के मुंह से भी व्यक्ति को बाहर लाने का सामर्थ्य है . “मृत संजीवनी” मन्त्र मृत्यु के भय से मुक्त करने के लिए अचूक मन्त्र है .

भयानक दुर्घटना, असाध्य रोग, दिल का दौरा, मारकेश की दशा, अष्टमस्थ शनि, राहू या केतु की दशा, बालारिष्ट योग

और कारागार बंधन का यदि भय हो तो महामृत्युंजय मन्त्र का अनुष्ठान अत्यंत लाभकारी है.

जप संख्या: कम से कम लघु 21,000 या दीर्घ 51,000 या कलयुग के नियमानुसार अधिकतम अति दीर्घ 1,25,000

अवधि: अत्यंत ही नाजुक परिस्थिति में अखंड या परिस्थिति अनुसार आवश्यक दिनों में

समय: यदि स्थिति अत्यंत नाजुक हो तो कभी भी.

 

लघु मृत संजीवनी जप
21,000 मंत्र जप + हवन
Rs 31,000/-
USD 365
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दीर्घ मृत संजीवनी जप
51,000 मंत्र जप + हवन
Rs 61,000/-
USD 718
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अति दीर्घ मृत संजीवनी जप
1,25,000 मंत्र जप + हवन
Rs 1,11,000/-
USD 1306
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