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ज्योतिष विद्या के अनुसार शनि को अशुभ ग्रह माना जाता है जिसका प्रभाव अधिकतर नकारात्मक ही पड़ता है. शनि एक कड़क शिक्षक भी है जो अपनी दशा में सहनशक्ति, धैर्य और प्रयास की परीक्षा लेता है.
शनि की साढ़े साती में जीवन में कई तरह की कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है जैसे शारीरिक कष्ट , अवरोध एवं अनेकानेक
प्रकार से क्षति उठानी पड़ सकती है ! इस अवधि में माता – पिता को भी कष्ट उठाना पड़ता है . उन्नति के लिए अधिक परिश्रम एवं संघर्ष करना पड़ता है . मानसिक अशांति , अनिद्रा , चोट – चपेट इत्यादि की समस्या लगातार बनी रहती है . सामन्यतया शनि की प्रथम साढ़े साती माता – पिता के लिए कष्टकारी , दूसरी साढ़े साती कार्य – व्यापार और दाम्पत्य जीवन में समस्या तथा अंतिम साढ़े साती स्वयं के स्वास्थ्य के लिए अधिक परेशानी का कारक होती है . किसी के भी जीवन में यह अधिकतम 3 बार ही आ सकती है .
शनि की साढ़े साती के नकारात्मक परिणामों को कम करने का एकमात्र प्रभावी उपाय है वैदिक शनि शांति अनुष्ठान.
अनुष्ठान में सम्मिलित है:
वैदिक शनि साढ़े साती शांति अनुष्ठान में शुभ महूर्त, दिशा, हवन समिधा का विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि शनि के नकारात्मक
प्रभावों को अधिक से अधिक घटाया जा सके.
जप संख्या: 23,000+2300+230 = 25,530
शनि साढ़े साती शांति पूजा की दक्षिणा राशि है – Rs. 15000 /- USD 178 मात्र (सभी सामान के साथ )
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