" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

Yogini Ekadashi/योगिनी एकादशी 

Yogini Ekadashi Vrat/योगिनी एकादशी व्रत

17  जून (बुधवार) 2020

Ekadashi 2020 / एकादशी 2020 

 योगिनी एकादशी का पौराणिक महत्व 

आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी योगिनी  एकादशी के नाम से जानी जाती है. योगिनी एकादशी का पुराणों में विशेष महत्व बताया गया है. इस एकादशी का व्रत नियमपूर्वक पालन करने से मनुष्य के समस्त पाप कट जाते हैं एवं जीवन में आनंद और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

व्रत विधिपुराणों के अनुसार दशमी तिथि  को  शाम में सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए और रात्रि में भगवान का ध्यान करते हुए सोना चाहिए। एकादशी का व्रत रखने वाले को अपना मन को शांत एवं स्थिर रखें. किसी भी प्रकार की द्वेष भावना या क्रोध मन में न लायें. परनिंदा से बचें.

प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करे तथा स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान् विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीप जलाएं. भगवान् विष्णु की पूजा में  तुलसी, ऋतु फल एवं तिल का प्रयोग करें। व्रत के दिन अन्न वर्जित है. निराहार रहें और शाम में पूजा के बाद चाहें तो फल ग्रहण कर सकते है. यदि आप किसी कारण व्रत नहीं रखते हैं तो भी  एकादशी के दिन चावल का प्रयोग भोजन में नहीं करना चाहिए।

एकादशी के दिन रात्रि जागरण का बड़ा महत्व है। संभव हो तो रात में जगकर भगवान का भजन कीर्तन करें। एकादशी के दिन विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मण भोजन करवाने के बाद स्वयं भोजन करें।

सागार: इस दिन मिश्री का सागार लेना चाहिए.

फल: योगिनी एकादशी का व्रत करने से अठाईस हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य प्राप्त होता है.

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