" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

सास बहू और ज्योतिष भाग- 1

सास बहू के झगड़े का ज्योतिषीय कारण

संयुक्त रूप से रहने वाले ज्यादातर लोगों की घरों की एक कॉमन समस्या हो सकती है। वह समस्या है सास बहू का झगड़ा, हालांकि हर घर में ऐसा हो यह जरूरी नहीं लेकिन तुलनात्मक रूप से उन घरों की संख्या अधिक हो सकती है, जहां सास बहू के बीच अनबन देखा जाता है। सीधे शब्दों में कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी कि, इस रिश्ते के बीच होने वाली खींचतान भी अब इसकी पहचान बनती जा रही है।

सास बहू के झगड़े की सामाजिक कारण तो होते ही हैं इसके ज्योतिषीय कारण भी होते हैं। सब जानते हैं कि सास बहू के बीच का रिश्ता कोई खून का रिश्ता नहीं होता बल्कि यह सामाजिक रूप से सौंपा गया रिश्ता होता है। हालांकि भारत के गांव में आज भी रिश्ता या रिश्तेदार ढूंढने में पुरुष ही अग्रणी देखा जाता है लेकिन शहरों में, अब घर की बड़ी और सयानी औरतें भी रिश्ते ढूंढने में दखल देती हुई देखी जा सकती है। इस परिपाटी के अनुसार हम यह कह सकते हैं कि कई मामलों में सास के पास बहू का चयन करने का अधिकार देखा जाता है, लेकिन ऐसा मामला अभी तक कम से कम मेरी जानकारी में नहीं आया जहां बहू अपनी सास का चयन करती हो। अलबत्ता अब घर के कुछ बड़े बुजुर्ग यह पूछने लगे हैं कि सास का स्वभाव कैसा है लेकिन अभी भी अधिकांश मामलों में यही देखने को मिलता है कि लड़की केवल अपने सम्भावित वर के गुण-अवगुण पर ही चर्चा करती है। जैसे कि लड़का क्या करता है, कितना कमाता है, कैसे रहता है? आदि आदि। अक्सर इन्हीं कसौटियों के ऊपर ही रिश्ते को परखा जाता है। जहां तक हमने समझा है इन बिंदुओं पर शायद ही ध्यान दिया जाता हो कि सास कैसी है, उसका स्वभाव कैसा है, वह कैसे विचारों वाली है, आदि-आदि। जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि ऐसे लोग हो सकते हैं लेकिन उनकी मात्रा बहुत कम होगी।

एक बात से तो सभी सहमत होंगे कि हम वर वधू की कुंडली का मिलान तो करते हैं लेकिन सास बहू कि कुंडली का मिलान नहीं करते।

आइए ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस मामले को समझा जाय। कुंडली का सप्तम भाव जीवन साथी का भाव होता है और कुंडली का चौथा भाव मां का भाव होता है। अब इससे सास के बारे में कैसे जाना जाए?

ज्योतिष के अनुसार कुंडली का दशम भाव जो सप्तम से चतुर्थ भाव होता है उससे हम सास के बारे में जान सकते हैं। उस भाव में स्थित राशि, उसके स्वामी की स्थिति तथा उस भाव में बैठे ग्रह और दृष्टि आदि माध्यम से उस भाग को प्रभावित करने वाले ग्रहों के अनुसार हम जातक या जातिका की सास के स्वभाव के बारे में जान सकते हैं।

  • यदि दशम भाव में एक से अधिक पाप ग्रहों का प्रभाव होता है तो सास के साथ असमंजस से देखा जा सकता है। हालांकि ऐसा मेरे अनुभव में देखने को मिला है कि दशम भाव में स्थित पाप ग्रह जातक या जातिका के कार्यक्षेत्र को आगे बढ़ाते हैं लेकिन वही ग्रह सास के साथ संबंधों को कमजोर करते हैं। यदि किसी स्त्री जातिका की कुंडली में दशम भाव पर एक से अधिक पाप ग्रहों का प्रभाव हो तो जातिका कामकाजी होती है लेकिन उसकी सास उसके काम का विरोध करती हुई देखी जाती है।

 

  • यदि कुंडली में के दशम भाव में एक से अधिक पाप ग्रहों का प्रभाव हो और जातिका हाउसवाइफ हो यानी कि कामकाजी न हो तो विवाद की संभावना अधिक रहती है। क्योंकि कामकाजी व्यक्ति को विवाद करने का समय नहीं मिलता, वह अपने काम में ही उलझा रहता है और जब थोड़ा बहुत समय मिलता है तो वह सुकून ढूंढता है, जिसे वह परिजनों के माध्यम से प्राप्त करना चाहता है। आपने देखा होगा कि कामकाजी महिलाएं दिनभर ऑफिस से काम करके जब घर लौटती हैं तो वह इतनी थक चुकी होती है कि अगर अपने घर वालों से थोड़ी सी बात करती हैं, घर के काम निपटाती हैं और आराम करना चाहती हैं। साथ ही दिन भर अलग अलग रहने से भी विवाद की संभावनाएं कम रहती हैं। अतः जिनकी कुंडली का दशम भाव एक से अधिक पाप ग्रहों के प्रभाव से युक्त हो ऐसी महिलाओं को घर से बाहर जाकर काम करने की सलाह हम दिया करते हैं।

 

  • यदि दशम में एक से अधिक पाप ग्रह बैठे हो तो वह चतुर्थ भाव को देखते हैं अथवा चतुर्थ में एक से अधिक भाव पाप ग्रह बैठे हो तो वह दशम भाव को देखते हैं यानी दशम यह चतुर्थ दोनो में से किसी भाव में अगर पाप ग्रह बैठे हैं तो वह घरेलू सुख शांति को बाधा पहुंचाते हैं, मानसिक अशांति देते हैं और चिड़चिड़ापन भी देते हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू विवाद बढ़ जाता है।

 

  • इसके अलावा जन्मपत्री में उपस्थित कमजोर, नीच राशि या पाप ग्रह के साथ बैठा चंद्रमा भी सास बहू के बीच झगड़ा करवाता है। यह भी देखने को मिला है कि सास बहू दोनों की अथवा कम से कम 2 में से 1 की कुंडली में चंद्रमा केतु या चंद्रमा शनि का संबंध देखने को मिलता है।

 

सारांश की कुंडली का दशम भाव एक से अधिक पाप ग्रहों के प्रभाव में हो अथवा चतुर्थ भाव एक से अधिक पाप ग्रहों के प्रभाव में हो तब सास बहू के बीच झगड़ा होता है। दूसरी स्थिति जो अक्सर देखने को मिलती है वो है चंद्रमा पर राहु, केतु और शनि जैसे पाप ग्रहों का प्रभाव। यह प्रभाव में मानसिक तनाव व घरेलू कलक के योग बनाता है। ऐसे में हमने सास बहू के बीच झगड़े होते हुए देखे गए हैं।

इस विवाद को शांत करने के लिए क्या करना चाहिए तो आप जान लें कि सबसे पहले किसी अच्छे ज्योतिषी को कुंडली दिखाकर झगड़े कारक ग्रह को ढूंढ़े। जब आप यह जान लेंगे कि इस ग्रह के कारण आपके घर में यह परेशानी आ रही है तो संबंधित ग्रह का उपाय करवाएं। संबंधित ग्रह के मंत्र का जप और हवन करवाएं। जब तक ग्रह शांति का अनुष्ठान हो पाए तब तक कुछ छोटे-छोटे टिप्स जो हम आपको बताने जा रहे हैं उन्हें अपनाएं।

टिप्स ये हैं कि-

  • कभी भी किसी बाहर के व्यक्ति से उपहार में सफेद चीजें, चांदी, पानी और दूध जैसी चीजें नहीं लेनी चाहिए बल्कि खाने या लगाने के रूप में केसर का प्रयोग करना चाहिए .
  • प्रत्येक चौथे महीने ‘रुद्राभिषेक‘ करवाना चाहिए।
  • रोज या कम से कम सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध मिला जल चढ़ाना चाहिए। इससे तुलनात्मक रूप से बेहतरीका अनुभव होगा।

जल्द ही हम अन्य लेखों के साथ साथ सास बहू से जुड़े अन्य पहलू भी रखेंगे।

पं. हनुमान मिश्रा 


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