" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
" ज्योतिष भाग्य नहीं बदलता बल्कि कर्म पथ बताता है , और सही कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है "
- पं. दीपक दूबे
Pt Deepak Dubey

                                                                  शनि गोचर 2०21

साल २०२१ में शनि ग्रह राशि परिवर्तन नहीं करेंगे और पूरे वर्ष अपनी स्वराशि यानी की मकर में ही रहेंगे, लेकिन इस साल शनि ग्रह का नक्षत्र परिवर्तन अवश्य होगा। साल की शुरुआत में शनि ग्रह उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में स्थित होंगे, और उसके बाद २२ जनवरी को शनि ग्रह श्रवण नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस तरह शनि देव संपूर्ण २०२१ उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्रों में ही गोचर करेंगे और उसी के अनुसार मनुष्य को इसका फल प्राप्त होगा। 

शनि की साढ़ेसाती 

जब शनि का गोचर जन्म राशि से बारावें भाव, पहले भाव व द्वितीय भाव से होता है तो उस कालावधि को शनि की साढ़े साती कहा जाता है। इस तरह से शनि एक राशि पर साढ़े सात साल तक अपना प्रभाव दिखता है इसी काल को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। एक राशि पर तीस साल बाद शनि की साढ़ेसाती आती है।

शनि की ढैय्या

जब शनि का गोचर जन्म राशि से चतुर्थ भाव और अष्टम भाव में होता है तब इसे शनि की ढैय्या कहते है। शनि की ढय्या का प्रभाव एक राशि पर रहता है। एक राशि पर लगभग सोलाह साल बाद शनि की ढैय्या आती है।

शनि देव का वक्री काल

23/05/2021, रविवार 09: 15: 00 बजे से शनि देव मकर राशि में वक्री होगे, और 11/10/2021, सोमवार 04:00:00 को शनि देव का मकर राशि में वक्री काल समाप्त होगा।

वक्री शनि देव का फल

वक्री होने का अर्थ है ग्रह आगे ना चलके पीछे की तरफ अपनी चाल करता है। सूर्य सिद्धांत में ग्रहों की आठ तरह की गति का वर्ण किया है। ग्रहों की चाल अतिशीघ्र, शीघ्र, मंद, मंदोतर और सम ये पाच मार्गी गति होती है और वक्र, अनुवक्र, कुटिल ये तीन ग्रहों की गति वक्री होती है। ग्रह जभी मार्गी या वक्री होता है तो वह सिर्फ आगे या पीछे चाल नही करते, वह उस चाल में भी कभी तेज चाल कभी मंद चाल, कभी एकदम ही रुक-रुक के चलते है। ग्रहों की सम चाल ही ठीक होती है, ग्रह ना तेज़ चलना चाहिए ना ज्यादा मंद चलना चाहिए, तभी वो प्रकृति के लिए शुभ होते है।

शनि देव जब वक्री चाल करते है तो वो अत्यंत प्रभावी होते है। शनि देव जब वक्री होते है तो प्रकृति मे उथल पुथल पैदा होती है तेज हवाएँ, भूस्खलन, भूकंप, 

किसी राष्ट्र या उस राष्ट्र के प्रमुख नेता में साथ या समस्त विश्व के साथ असंतोष, चिंता का वातावरण उत्पान होता है। शेयर बाजार, कोयला, तेल, स्टील और लोहे से संबंधित व्यापारो में नुकसान होता है।

जन्म कुंडली में शनि देव यदि वक्री अवस्था में है तो उसे गोचर के वक्री शनि शुभ फल प्रदान करते है।

वक्री शनि देव काम मे रुकावटें लाते है इसलिए इस समय नया व्यापार, नये काम की शुरुआत नही करना चाहिए।

2021 में राशियों के अनुरूप शनि गोचर का फल

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके दशम भाव में गोचर करेंगे जिसके कारण इन जातकों को व्यापार कार्यस्थल पर अधिक ज्यादा परिश्रम करना पड़ेगे। पिता की सेहत मे कोई परेशानी आ सकती है। मेष राशि मे इस साल शनि का शश नामक योग बना रहा है। जो समाज में कुछ प्रतिष्ठा प्राप्त हो सकती है, सहनशीलता, परिश्रम करने की शक्ति प्रदान करेगा, अगर आप भूमि, भवन के काम करते हो में सफलता प्राप्त होगी। पैरों मे दर्द और, नींद की कमी की समस्या हो सकती है।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके नवम भाव में गोचर करेंगे, यह समय यात्राआे का या विदेश यात्रा का योग बनता है। धार्मिक कार्य मे भाग लेंगे, धार्मिक, सेवा के कार्य मे मन लगेगा। किसी बुजुर्ग की मौत का शौक संदेश आ सकता है। धनहानि, संपत्ति के हानि के योग बन सकते है, कुछ नया मकान या जमीन खरीद के लिए कुछ समस्या उत्पन हो सकती है। वर्ष के अंत में कार्य मे सफलता के योग है।

 मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके अष्टम भाव में गोचर करेंगे, मिथुन राशि वालों की इस साल शनि की ढैय्या रहेगी तो कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इस साल जातक को कुछ सेहत की समस्या का सामना करना पड सकता है। संतान और मित्रो से वैचारिक मतभेद, धन और संपत्ति की कुछ हानि के योग, घर में कोई जानवर हो तो उसे भी कुछ हानि हो सकती है। यह समय कुछ चुनौती भरा हो सकता है इसलिए योगा मेडिटेशन करने से बोहत लाभ प्राप्त होगा। क्योंकि शनि देव योग का कारक है।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके सप्तम भाव में गोचर करेंगे, गोचर का सप्तम भाव का शनि कर्क राशि वाले जातकों की पत्नी की सेहत में कुछ समस्या दर्शाता है इसलिए थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए । कुछ वैवाहिक मत भेद भी उत्पन होते है। मान – सम्मान के योग, लंबी यात्राओं के योग, व्यापार मे सफलता के अच्छे योग है पर अगर आप के साझेदारी के काम होंगे तो उसमे मतभेद उत्पन्न हो सकते है। प्रेम संबंधों के लिए यह समय ठीक है, कुछ दूरियां होगी तो वह दूरियां मिट जायेगी।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके छठे भाव में गोचर करेंगे, छठे भाव का शनि कार्यों में सफलता देगा। आपके विरोधी आपसे जीत नही पाएंगे। कोई कानूनी केस होगा तो उसमे सफलता प्राप्त होगी। खुशियां प्राप्त होगी, अल्प प्रयासों से सफलता प्राप्त होगी। विदेश यात्रा के योग या यात्रा के योग बनेंगे। प्रेम संबंधों मे उतार चढ़ाव रहेंगे। सेहत में थोटी मोटी परेशानी आसक्ति है इसलिए सेहत का ध्यान रखें की ज्यादा आवश्यकता है।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके पंचम भाव में गोचर करेंगे, धन सम्पत्ति के लिए यह समय अच्छा है, आय के अच्छे स्रोत बनायेगा। व्यापार में तरक्की के योग पर आवेश में आकर कोई निर्णय ना ले। संतान पक्ष से कुछ परेशानियां उत्पन हो सकती है। विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र मे कुछ रुकावटें आ सकती है। प्रेम संबंधों के लिए यह वर्ष उत्तम रहेगा जो विवाह करना चाहते है उनके विवाह के योग है। विदेश यात्रा के योग बनेंगे। 

तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके चतुर्थ भाव में गोचर करेंगे, तुला राशि वालों की इस साल शनि की ढैय्या रहेगी तुला राशि वालों पर शनि की विशेष कृपा रहती है। पर ढैय्या में उन्हे कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। कार्यों में दबाव, मानसिक तनाव का सामना करना पड़ेगा। सेहत में कुछ परेशानियों का समाना करना पड़ सकता है। माता को किसी तरह का कष्ट सेहना पड सकता है। भूमि, मकान या कोई प्रॉपर्टी खरीदने के पूरे योग है। समाज में मान प्रतिष्ठा प्राप्त होगी, कई खुशियां प्राप्त होगी।

 वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके तृतीय भाव में गोचर करेंगे, नौकरी पेशा वाले लोगों को यह वर्ष उत्तम शुभ परिणाम देगा, आपके सहयोगी आपके प्रभाव में रहेंगे, आप को सहयोग प्रदान करेंगे। धन, सम्पत्ति मे यह साल वृद्धि करेगा, कोई नई प्रॉपर्टी खरीदना लाभप्रद होगा। लम्बे समय से अटके हुए काम पूर्ण होंगे। जीवन में खुशियां मेहसूस करोगे, यात्रा के योग, यात्राओं से लाभ प्राप्त होंगे, भाग्य पूरा सहयोग करेगा।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके द्वितीय भाव में गोचर करेंगे, धनु राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण होगा इससे कई परेशानियों का अंत और धन संबंधी कार्य पूर्ण होंगे, धन में वृद्धि होगी। घर से दूर रहने के योग बनेंगे, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे। पैतृक संपत्ति से लाभ प्राप्ति के योग, भाग्य पूरा सहयोग देगा। वाणी पे नियंत्रण रखनी की आश्यकता है। किसी संस्था से धन प्राप्ति के योग।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके प्रथम भाव में गोचर करेंगे, शनि स्वयं मकर राशि में गोचर करेंगे मकर राशि वालों के लिए यह साढ़ेसाती का द्वितीय चरण है। जिसके कारण वरिष्ठ वर्ग से कुछ दबाव बनाने की संभावना बनेगी। सेहत में कुछ परेशानीया हो सकती है। धन संबंधी कार्य में सफलता प्राप्त होगी, कार्यों में सफलता के योग, पिता से सहयोग प्राप्त होगा। परिवार तनाव बनेगा, पैतृक संपत्ति से लाभ प्राप्त होगा, मान सम्मान प्राप्त होगा।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके बारवे भाव में गोचर करेंगे, कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण रहेगा। कुंभ राशि वालों के यह समय परेशानियां बढ़ने वाला रहेगा। जीवन साथी का स्वास्थ खराब रहेगा जिससे धन का व्यय होगा। व्यापार में नौकरी में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। धन का व्यय होगा। व्यर्थ की यात्रा या भटकाव होगा। शत्रुओं द्वारा कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, अकेलापन बढ़ेगा।

मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए शनि देव इस साल उनके ग्यारहवें भाव में गोचर करेंगे, यह शनि काफी सकारातमक परिणाम देंगे। धन, सम्पत्ति में वृद्धि होगी, मित्रो का सहयोग प्राप्त होगा। कार्यों में सफलता प्राप्त होगी, विरोधियों पे विजय प्राप्त करोगे। संतान से मधुर संबंध बढ़ेंगे, शिक्षा के क्षेत्र में या कार्यों में कुछ रुकावटें आयेगी। विदेशी स्रोत से लाभ होगा, प्रेम संबंधों के लिए यह समय महत्वपूर्ण बदलाव करेगा।

राशिओ को कब साढ़ेसाती और ढैय्या होगी ये विश्लेषण

मेष राशि

साढ़ेसाती- 29 मार्च 2025 से 31 मई 2031 तक

ढैय्या 13 जुलाई 2037 से 24 अगस्त 2037 तक

   – 12 दिसंबर 2043 से 6 दिसंबर 2046 तक

 वृषभ राशि

साढ़ेसाती- 3 जून 2027 से 13 जुलाई 2034 तक

ढैय्या 27 अगस्त 2037 से 22 अक्टूबर 2034 तक

मिथुन राशि 

साढ़ेसाती- 6 अगस्त 2029 से 27 अगस्त 2037 तक

ढैय्या-      26 जनवरी 2020 से 29 अप्रैल 2022 तक

             22 अक्टूबर 2038 से 29 जनवरी 2041 तक

कर्क राशि 

साढेसाती- 31 मई 2032 से 22 अक्टूबर 2038 तक

ढैय्या-    – 29 अप्रैल 2022 – 29 मार्च 2025 तक

           – 29 जनवरी 2041 से 12 दिसंबर 2043 तक

सिंह राशि

साढ़ेसाती- 13 जुलाई 2034 से 29 जनवरी 2041 तक

ढैय्या- 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक

       -22 दिसंबर 2043 से 6 दिसंबर 2046 तक

कन्या राशि

साढ़ेसाती- 27 अगस्त 2037 से 12 दिसंबर 2043 तक

ढैय्या- 3 जून 2027 से 8 अगस्त 2029 तक

तुला राशि 

साढ़ेसाती- 22 अक्टूबर 2038 से 8 दिसंबर 2046 तक

ढैय्या- 24 जनवरी 2020 से 29 अप्रैल 2022 तक

      6 अगस्त 2029 से 31 मई 2020 तक

वृश्चिक राशि 

साढ़ेसाती- 28 जनवरी 2041 से 3 दिसंबर 2049 तक

ढैय्या- 29 अप्रैल 2022 से 29 मार्च 2025 तक

   – 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक

धनु राशि  

साढ़ेसाती-  12 दिसंबर 2043 से 3 दिसंबर 2049 तक

ढैय्या- 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक

   13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक

मकर राशि

साढ़ेसाती- 26 जनवरी 2017 से 29 मार्च 2025 तक

ढैय्या- 3 जून 2027 से 8 अगस्त 2027 तक

   27 अगस्त 3036 से 22 अक्टूबर 3038 तक

कुंभ राशि  

साढ़ेसाती- 24 जनवरी 2020 से 3 जून 2027 तक

ढैय्या 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक

  22 अक्टूबर 2038 से 29 जनवरी 2041 तक

मीन राशि 

साढ़ेसाती- 29 अप्रैल 2022 से 8 अगस्त 2029 तक

ढैय्या  31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक

        -29 जनवरी 2041 से 12 दिसंबर 2043 तक

शनि देवता की शुभता के लिए उपाय 

जब भी शनि देव नकारात्मक फल प्रदान करते हो तो उनके पूजन, दान, जप, उपाय करने का विधान है।

शनि देव के इन मन्त्रों का एक माल जप करने से शनि देव के कष्टों से लाभ प्राप्त होगा।

१.ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:

२.ॐ शं शनैश्चराय नम: 

शनि देव आध्यात्म, योग के कारक है इसलिए योगासन, मेडिटेशन से शनिदेव की शुभता बढ़ेगी।

प्रत्येक शनिवार को संध्या समय में पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव शुभ फल देते है।

दशरथ कृत शनि स्तोत्र ” का पाठ करना।

जरूरतमंदों की मदद करने से।

जिन लोगों को शनि की पीड़ा का ज्यादा फल भोगना पड़ता है उन्हें पारद शिवलिंग की आराधना करना चाहिए।

दिव्याकान्ति लोकनार

AstroTips Team


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