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लग्न कुंडली में दूषित शनि का प्रभाव बहुत ही नकारात्मक होता है. बुरे प्रभावों का परिणाम आय में कठिनाई, सदैव धन का अभाव, स्वास्थहानि, दुर्घटना और लड़ाई झगडा प्रमुख है. दूषित शनि जातक को कारागार तक पहुचने में सक्षम है. नीच का शनि या शनि की दशा अपने शत्रु लग्न में नकारात्मक प्रभाव देता है. उदाहरण के लिए मेष लग्न की कुंडली में छठवे ओर आठवे घर का शनि नकारात्मक प्रभाव देता है.
शनि ओर चंद्रमा की युति भी नकरात्मक परिणाम देती है . यह योग विष्कुम्भ योग कहलाता है. शनि ओर राहू की युति सदैव ही बुरा प्रभाव देती है.नीच का शनि या दूषित शनि के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए वैदिक शनि अनुष्ठान ही एकमात्र उपाय है.
शनि शांति अनुष्ठान में शनि मंत्र जप, स्तुति और यज्ञ किया जाता है. वैदिक शनि शांति अनुष्ठान में शुभ महूर्त, दिशा, हवन समिधा का विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि दूषित शनि के नकारात्मक प्रभावों को अधिक से अधिक घटाया जा सके.
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शनि शांति अनुष्ठान (एक दिवसीय) |
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शनि शांति अनुष्ठान (आठ दिवसीय) |
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